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Amazing Temple देश के चमत्कारी नाग मंदिरों की कहानी, यहां होती है सांपों की पूजा, इस जगह हुई थी शिव और देवी पार्वती की शादी

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Khabarwala 24 News New Delhi : Amazing Temple हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की भी परंपरा रही है। हमारे देश में जिस तरह प्राचीन युग से ही देवी-देवताओं की पूजा होती आ रही हैं, उसी तरह नागों से जुड़े ये मंदिर देश के अलग-अलग कोने में बने हुए हैं। इनमें से एक मंदिर उज्जैन में है, जिसे नागचंद्रेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। दूसरे मंदिर का नाम है भुजंग नाग मंदिर, जो कि गुजरात में है। तीसरा नागों से जुड़ा मंदिर जम्मू और कश्मीर राज्य में एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है, जिसे नाग मंदिर पटनीटॉप के नाम से जाना जाता है। इन मंदिरों से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य है, जिन्हें आजतक कोई नहीं जान पाया है। आइए मंदिरों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

भुजंग नाग, मंदिर (Amazing Temple)

भुजंग नाग मंदिर गुजरात के भुज में बना है। नाग पंचमी के दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है। कथाओं के अनुसार ये मंदिर नागों के आखिरी वंश भुजंग के नाम पर बनवाया गया था, जिसे ही अब भुजंग नागा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों की सारी मुरादें पूरी होती हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन (Amazing Temple)

भारत में अगर सबसे पहले किसी नाग मंदिर के बारे में बात की जाए तो वो है उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर। यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर बना हुआ है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में एक बहुत ही प्राचीन प्रतिमा मौजूद है, जो बताया जाता है उज्जैन के अलावा दुनिया में कही भी नहीं है। पूरी दुनिया में ये एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान शिव विराजित हैं। शिव शंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। इस मंदिर से जुड़ी एक मान्यता मंदिर को और खास बनाती है, जिसमें कहा जाता है इस मंदिर की सुरक्षा आज भी नागराज तक्षक करते हैं और ये मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन दर्शन के लिए खोला जाता है।

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नाग मंदिर, पटनीटॉप (Amazing Temple)

नागचंद्रेश्वर मंदिर के बाद अगर सबसे पुराने किसी नाग मंदिर के बारे में बात की जाएं तो वो नाग मंदिर, मंतलाई है, जो 600 साल पुराना मंदिर बताया जाता है। माना जाता है कि नाग मंदिर देश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शिव और देवी पार्वती का इस मंदिर में विवाह हुआ था लेकिन ये प्राचीन मंदिर पूरी तरह नाग देवता को समर्पित है। नाग पंचमी उत्सव के दौरान हजारों तीर्थयात्री इस मंदिर में आते हैं और नाग पंचमी में यहां सांपों की पारंपरिक रूप से पूजा की जाती है।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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