लखनऊ, 28 दिसंबर (khabarwala24)। उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद लोगों में एक बार फिर आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में रविवार को सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने इस फैसले को बेहद दुखद और चिंताजनक बताते हुए न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
समाचार एजेंसी khabarwala24 से खास बातचीत में नेहा सिंह राठौर ने कहा कि उन्नाव जैसे जघन्य अपराध में एक दोषी की सजा का निलंबन होना बेहद चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। यह बेहद हैरान करने वाला है कि एक सजायाफ्ता अपराधी की सजा को निलंबित किया जा सकता है। यह फैसला बहुत दुखद और चिंताजनक है। इस तरह की कार्रवाइयां देश की बेटियों का मनोबल तोड़ देती हैं।
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे फैसले बेटियों के हौसले को कुचल देते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए नेहा सिंह राठौर ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह इस फैसले पर क्या कहें। उन्होंने कहा कि यह बहुत गलत है। यह नया भारत है, जहां कुछ भी हो सकता है। बलात्कारियों को पैरोल पर छोड़ा जा सकता है, नेहा सिंह राठौर की याचिकाएं खारिज की जा सकती हैं और अंकिता भंडारी मामले में पीड़िता की मां न्याय के लिए रो रही है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल रहा।
उन्होंने कहा कि पूरा देश उन्नाव की ‘निर्भया’ की हालत देख रहा है और फिर भी व्यवस्था संवेदनहीन बनी हुई है। नेहा सिंह राठौर ने देश की जनता, खासकर महिलाओं और बेटियों से आगे आकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं देश के लोगों से, खासकर बहनों और बेटियों से अपील करती हूं कि वे आगे आएं और अपनी आवाज उठाएं, जैसे निर्भया के समय पूरा देश सड़कों पर उतर आया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डर का माहौल है और हर कोई खुलकर लड़ नहीं पाता। नेहा सिंह राठौर ने कहा कि जब भी मैं अपनी आवाज उठाती हूं, तो मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। हर लड़की या हर परिवार में इतनी ताकत नहीं होती कि वह मजबूती से लड़ सके।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हिंदुओं को 3-4 बच्चे पैदा करने के सुझाव पर नेहा सिंह राठौड़ ने कहा कि मेरा मानना है कि छोटा परिवार सुखी परिवार होता है। आज बढ़ती महंगाई के साथ, परिवार पालना बहुत मुश्किल हो गया है। 3-4 बच्चे होना कोई बड़ी बात नहीं है। अच्छी शिक्षा और बेसिक जरूरतें देना मुश्किल है, खासकर जब कोई सिर्फ 15-20 हजार रुपये कमाता हो या प्राइवेट नौकरियों में संघर्ष कर रहा हो। मुझे नहीं पता कि इस देश में क्या हो रहा है, कोई भी कुछ भी कह सकता है।
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