तमिलनाडु : एसआईआर के खिलाफ डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन, राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी

चेन्नई, 8 नवंबर (khabarwala24)। डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने 11 नवंबर को तमिलनाडु के सभी जिलों में राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में है।गठबंधन सहयोगियों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में अधिकांश राजनीतिक […]

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चेन्नई, 8 नवंबर (khabarwala24)। डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने 11 नवंबर को तमिलनाडु के सभी जिलों में राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में है।

गठबंधन सहयोगियों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में अधिकांश राजनीतिक दलों द्वारा व्यापक आपत्तियों के बावजूद चुनाव आयोग पर संशोधन को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। गठबंधन ने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया ‘राजनीति से प्रेरित’ है और मतदाता सूची से अल्पसंख्यक और भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने के इरादे से की गई है।

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बयान में तमिलनाडु सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर लागू करने के चुनाव आयोग के फैसले को अलोकतांत्रिक बताया, जिसका उद्देश्य नागरिकों के मताधिकार को ‘कमजोर’ करना था। साथ ही दावा किया कि बिहार मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने में कथित रूप से विफल रहा है।

नेताओं ने तर्क दिया कि मौजूदा भ्रमों को दूर किए बिना संशोधन करने में आयोग की जल्दबाजी ने इस प्रक्रिया में जनता का विश्वास कम कर दिया है।

गठबंधन ने गिनती के समय को लेकर भी चिंता जताई है। तमिलनाडु में गिनती का समय उत्तर-पूर्वी मानसून के साथ मेल खा रहा है। इससे जिला और स्थानीय अधिकारी पहले से ही बारिश की राहत और आपदा में व्यस्त रहेंगे। इस वजह से संशोधन प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाएगी।

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इसके अलावा, गठबंधन ने इस प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों में कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया।

इसने कहा कि कई क्षेत्रों में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने अभी तक गणना फॉर्म वितरित करना शुरू नहीं किया है। साथ ही राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के साथ उचित संचार चैनल स्थापित नहीं किए हैं।

गठबंधन ने बताया कि 2002 और 2005 की मतदाता सूचियां, जो वर्तमान में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, अधूरी हैं और अधिकारियों तथा राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच भ्रम पैदा कर रही हैं।

Source : IANS

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