नई दिल्ली, 11 दिसंबर (khabarwala24)। योग हमारी प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। उत्तान मंडूकासन ऐसा ही एक प्रभावी आसन है, जो शरीर की संतुलन शक्ति को भी बढ़ावा देने में मददगार होता है।
उत्तान मंडूकासन तीन शब्दों (उत्तान, मंडूक और आसन) के मेल से बना है। ‘उत्तान’ का मतलब ऊपर की ओर तना हुआ, ‘मंडूक’ यानी मेंढक, और ‘आसन’ यानी मुद्रा। यह एक ऐसी मुद्रा है जो शरीर को ऊपर की ओर तानकर की जाती है और इसे मेंढक समान शरीर की स्थिति में किया जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित रूप से अभ्यास करने से कई तरह के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। रोजाना अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है, जिससे पीठ के दर्द और कमजोर हड्डियों में राहत मिलती है। यह आसन शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी मदद करता है। यह ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व शरीर के अंगों तक बेहतर तरीके से पहुंचते हैं।
इसको नियमित करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद दोनों पैरों के अंगूठे आपस में जुड़े होते हैं और घुटने खुले रहते हैं। इसके बाद, धीरे-धीरे सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाकर कंधों के ऊपर विपरीत दिशा में रखें। इस स्थिति में, आपकी पीठ और गर्दन पूरी तरह से सीधी होनी चाहिए। कुछ समय तक इस स्थिति में बने रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस आसन का अभ्यास करते समय ध्यान रखें कि अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगाएं।
यह आसन शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्रदान करता है। अगर किसी को कोहनी, पीठ, रीढ़ की हड्डी या फिर कोई गंभीर बीमारी है या सर्जरी हुई है, तो इस योगासन का अभ्यास न करें।
इस आसन के अभ्यास के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगाएं क्योंकि इससे चोट लगने की संभावना बढ़ सकती है।
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