शक्सगाम घाटी को लेकर टीएस सिंहदेव बोले, अगर भारतीय जमीन पर निर्माण हो रहा तो यह सरकार की विफलता

नई दिल्ली, 13 जनवरी (khabarwala24)। कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने मंगलवार को भारत-चीन सीमा विवाद, अमेरिका-ईरान व्यापार टैरिफ, अमेरिका-भारत संबंधों और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित शक्सगाम घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच […]

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नई दिल्ली, 13 जनवरी (khabarwala24)। कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने मंगलवार को भारत-चीन सीमा विवाद, अमेरिका-ईरान व्यापार टैरिफ, अमेरिका-भारत संबंधों और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित शक्सगाम घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव पर टीएस सिंहदेव ने khabarwala24 से कहा कि अगर भारतीय जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण हो रहा है, तो भारत को ऐसी स्थिति को रोकने में सक्षम होना चाहिए था।

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उन्होंने सवाल किया कि किसी दूसरे देश का व्यक्ति भारत की सीमा में कैसे प्रवेश कर सकता है और वहां काम कैसे कर सकता है। सिंहदेव ने कहा कि यदि यह खबर सही है, तो यह सरकार की बड़ी विफलता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी जानकारी को देश से छिपाना एक गंभीर खामी है।

वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए टैरिफ को लेकर भी कांग्रेस नेता ने तीखी प्रतिक्रिया दी। टीएस सिंहदेव ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि ट्रंप खुले तौर पर टैरिफ थोप रहे हैं। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष का इस तरह पूरी दुनिया के साथ धौंस जमाने वाला रवैया अपनाना पूरी तरह अनुचित, अनैतिक और अस्वीकार्य है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएस सिं देव ने कहा, “राष्ट्रपति कुछ और कहते हैं तो राजदूत कुछ और। दोनों में से कोई भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। यह किस तरह का सिस्टम है? यह भरोसे से परे है।”

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अयोध्या राम मंदिर दर्शन की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि वे खुद भी वहां नहीं गए हैं। अब इस स्थान को एक तरह का तमाशा बना दिया गया है।

टीएस सिंहदेव ने करीब 31 साल पहले एक राष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बताया कि राम जन्मभूमि स्थल पर पहले 60-70 अलग-अलग चबूतरे हुआ करते थे, जहां लोग राम जन्मभूमि और भगवान राम के जन्मस्थान में आस्था रखते थे। ये स्थल गहरी श्रद्धा के केंद्र थे, जहां जाकर भगवान राम के जन्म से जुड़े पहलुओं को समझा जा सकता था। बाद में ये सभी मुद्दे एक अलग विवाद में उलझ गए और मूल आस्था पीछे छूट गई। कोई नहीं चाहता कि आस्था को दिखावे की चादर ओढ़ाने की कोशिश करे।

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