‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के उद्घाटन से पहले कपिल मिश्रा बोले- जिहादी और नक्सली वैचारिक आतंकवाद पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक

नई दिल्ली, 2 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ के उद्घाटन से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-विरोधी, देश-विरोधी और धर्म-विरोधी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वाली कोशिशों का विरोध करने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं।दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में तीन […]

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नई दिल्ली, 2 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ के उद्घाटन से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-विरोधी, देश-विरोधी और धर्म-विरोधी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वाली कोशिशों का विरोध करने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं।

दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में तीन दिन चलने वाला सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ शुक्रवार से शुरू होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगी।

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समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में कपिल मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे में कहा, “दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में ‘शब्दोत्सव’ शुरू हो रहा है। दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन की ओर से इसका आयोजन किया जा रहा है और यह देश का सबसे बड़ा लिटरेचर फेस्टिवल है।”

कपिल मिश्रा ने कहा कि तीन दिन चलने वाले कार्यक्रम में 100 से ज्यादा स्पीकर होंगे। इस दौरान, 6 कल्चरल प्रोग्राम हो रहे हैं। दो बड़े कवि सम्मेलन होंगे और 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन होगा। उन्होंने बताया कि 40 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं और प्रोफेसर भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।

उन्होंने बताया कि सुनील आंबेकर, मनमोहन वैद्य और सच्चिदानंद जोशी जैसी हस्तियां कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। इसके अलावा सांस्कृतिक कलाकारों में ‘माधव बैंड’, ‘पांडव बैंड’ और हंसराज रघुवंशी होंगे। राष्ट्र, धर्म और संस्कृति को लेकर देश की प्रखर आवाज बनने वाली प्रमुख हस्तियां कार्यक्रम में नजर आएंगी।

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इसी बीच, कपिल मिश्रा बोले, “मैं यह कहना चाहता हूं कि जो जिहादी और नक्सली वैचारिक आतंकवाद इस देश में चलाने की कोशिश की गई थी, उन पर एक सर्जिकल स्ट्राइक इस लिटरेचर फेस्टिवल के जरिए की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि भारत में पहले संस्कृति और साहित्य के नाम पर राष्ट्र-विरोधी, देश-विरोधी और धर्म-विरोधी विचारधाराओं को थोपने की कोशिश की गई थी। इसका प्रतिकार करने के लिए भी ‘शब्दोत्सव’ जैसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली में हर साल इसी तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

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