नई दिल्ली, 8 दिसंबर (khabarwala24)। केंद्र सरकार देश में ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादन को लेकर लगातार प्रयासरत है। इस क्रम में सरकार ने हाल ही में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार 19,744 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) चला रही है, ताकि देश को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।
नवंबर 2025 तक की प्रगति के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत 18 कंपनियों को प्रति वर्ष 8,62,000 टन की कुल उत्पादन क्षमता प्रदान की गई है। इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत, 15 कंपनियों को प्रति वर्ष 3,000 मेगावाट की कुल विनिर्माण क्षमता प्रदान की गई है। रिफाइनरियों के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की खरीद के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 2 कंपनियों को प्रति वर्ष 20,000 टन की कुल क्षमता प्रदान की गई है। इस्पात, शिपिंग और परिवहन क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग के लिए प्रायोगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
केंद्र सरकार पहले से ही प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी: एमबीवाई), प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम), और अन्य कार्यक्रमों के साथ, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमान) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के तहत जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की बस्तियों/गांवों के लिए नई सौर ऊर्जा योजना जैसी विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है।
ये योजनाएं सामूहिक रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों सहित देश भर में सौर ऊर्जा आधारित मिनी ग्रिड और छत पर सौर परियोजनाओं की तेजी से तैनाती में मदद करती हैं।
पवन, सौर और जैव ऊर्जा परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और 2030 के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सरकार ने केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत किया है और सौर, पवन तथा हरित ऊर्जा कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी के लिए राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टल (एनआरईपी) विकसित किया है।
सरकार ने आरईआईए, राज्य नोडल एजेंसियों और डेवलपर्स से डेटा एकत्र करके तत्क्षण निगरानी व्यवस्था स्थापित की है, प्रतिस्पर्धी बोली दिशा-निर्देशों के तहत समय-सीमा निर्धारित की है, और प्रगति की समीक्षा तथा बाधाओं को दूर करने के लिए डेवलपर्स के साथ मासिक हितधारक बैठकें आयोजित की हैं। यह जानकारी केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
Source : IANS
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