सूरत/वडोदरा, 5 जनवरी (khabarwala24)। हरिद्वार काशी पीठ के संत विजयानंद पुरी महाराज ने सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के 1,000 वर्ष पूरे होने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म न पहले खत्म हो पाया और न ही कभी खत्म होगा।
संत विजयानंद पुरी महाराज ने khabarwala24 से कहा कि आक्रांताओं के हजारों प्रयासों के बावजूद सनातन आज भी जीवित है, जाग्रत है और निरंतर आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद सनातन संस्कृति और हिंदुत्व को न केवल देश में, बल्कि पूरे विश्व में नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा, “1026 में मुहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा, लेकिन आज भी वही सोमनाथ अपनी पूरी दिव्यता के साथ खड़ा है। यही सनातन की सबसे बड़ी शक्ति है। सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, मन और बुद्धि की चेतना का प्रतीक है।”
उन्होंने बताया कि सोमनाथ का संबंध चंद्रमा से है, इसलिए इसे ‘सोम’ कहा जाता है, जो शांति और कल्याण का प्रतीक है। यही कारण है कि यह मंदिर समुद्र तट पर स्थित होकर भी पूरे विश्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
संत विजयानंद पुरी महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण स्वयं सोमनाथ के दर्शन करने आए थे। इसी कारण यहां ‘हरि-हर’ का संबोधन किया जाता है। उन्होंने कहा कि गुजरात की भूमि धन्य है, जहां द्वारकाधीश और सोमनाथ बाबा दोनों विराजमान हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अक्सर कहता हूं कि भारत जैसा देश नहीं, गुजरात जैसा राज्य नहीं और सूरत जैसा शहर नहीं। सोमनाथ और द्वारकाधीश दोनों यहीं हैं। यही हमारी सनातन परंपरा की सबसे बड़ी पहचान है।”
संत विजयानंद पुरी महाराज ने प्रशंसा करते हुए कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को नई दिशा दी है। आज देश-विदेश में महाकाल, सोमनाथ और बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। जो लोग हजार साल पहले कुछ नहीं कर पाए, वे आज भी कुछ नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आज देश का युवा सनातन मूल्यों से जुड़ रहा है और हर संकट में सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन की अपेक्षा करता है।
वहीं, वडोदरा से सनातन संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ज्योतिर्नाथ ने भी सोमनाथ को सनातनियों के लिए गौरव और आनंद का विषय बताया।
उन्होंने कहा, “वेदों में उल्लेख है कि प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ है। 1026 में आक्रांताओं ने इसे ध्वस्त किया, लेकिन उसके बाद भी इसका पुनरुत्थान हुआ। आज 1,000 वर्ष पूरे होना सनातन धर्म की जीवंतता का प्रमाण है। ‘सोम’ का अर्थ शांति, कल्याण और चंद्रमा से जुड़ा हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ऊर्जा पूरे विश्व में शांति और सद्भाव का संदेश देती है।”
उन्होंने कहा, “आज जब पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और महामारी जैसी स्थितियों से जूझ रही है, तब सोमनाथ जैसी आध्यात्मिक शक्तियां विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखा सकती हैं।”
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