पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने ‘शब्दोत्सव’ को सराहा, बोले- शरीर के नष्ट होने के बाद भी जिंदा रहता है शब्द

नई दिल्ली, 3 जनवरी (khabarwala24)। नई दिल्ली में आयोजित ‘शब्दोत्सव 2026’ का शनिवार को दूसरा दिन रहा। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित प्रहलाद सिंह टिपानिया ने इसे लोगों को जोड़ने का तरीका बताया और कार्यक्रम की सराहना की।प्रहलाद सिंह टिपानिया ने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत करते हुए कहा, “दिल्ली सरकार और आयोजकों द्वारा नए […]

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नई दिल्ली, 3 जनवरी (khabarwala24)। नई दिल्ली में आयोजित ‘शब्दोत्सव 2026’ का शनिवार को दूसरा दिन रहा। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित प्रहलाद सिंह टिपानिया ने इसे लोगों को जोड़ने का तरीका बताया और कार्यक्रम की सराहना की।

प्रहलाद सिंह टिपानिया ने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत करते हुए कहा, “दिल्ली सरकार और आयोजकों द्वारा नए साल के अवसर पर शब्दोत्सव 2026 के आयोजन की जो शुरुआत हुई है, वह बहुत ही सराहनीय है। शब्द ही सबकुछ है। एक शब्द इंसान को घाव और एक शब्द दवा का काम करता है। इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को मेरा बहुत साधुवाद है। यह बहुत ही अच्छा आयोजन है।”

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उन्होंने कहा, “शब्दों के जरिए पूरे मानव को जोड़ने का तरीका बहुत ही उत्कृष्ट है, इसलिए हम साधुवाद दे रहे हैं कि उन्होंने कबीर और संतों की वाणी के लिए उनके मन में जो कुछ था, उसे मूर्त रूप दिया और हमें कबीर की वाणी को सुनने का अवसर मिला। कबीर और संतों की वाणी वह है जो इंसान के जीवन की दूरियों और दर्शन को साक्षीभूत करती है और पूरे मानवमात्र को जोड़ने का काम करती है। हम उठकर पूरे कायनात में बिना किसी हद, रुकावट और पक्षपात के प्रेम और भाईचारे के साथ रह सकते हैं। ऐसे में यह बहुत ही सराहनीय कार्यक्रम और उत्कृष्ट कार्य है।”

टिपानिया ने कहा, “मैंने कार्यक्रम में जैसा शब्दोत्सव देखा, उसी तरह के गीत को गाया। कबीर और संतों की वाणी शब्द ही है। शब्द वह है, जो पहले उस समय भी था, जब शरीर था। यह उस समय तक जिंदा रहेगा, जब शरीर भी नहीं रहेगा। ऐसे में इस तरह के आयोजन से अगर मानव समाज में एक प्रकार की चेतना और समझ आती है तो बहुत अच्छी बात है। यह उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य है।”

उन्होंने बताया, “कबीर वह हैं, जो सभी की खैरियत चाहते हैं। वर्तमान समय में अनेक प्रकार की जो हदें हैं, जिनमें धर्म, जाति, रंग, ऊंच-नीच आदि शामिल हैं, अगर उन चीजों से ऊपर उठकर हम उस चेतना और ऊर्जा को महसूस करें, जो सभी को चलाती है, तो हर इंसान अमन-शांति से रह सकेगा। ऐसे आयोजन चाहे कोई भी कराए, वह सराहनीय है। यह कार्यक्रम लोगों को जोड़ने का माध्यम बन गया है, जो उत्कृष्ट कार्य है।”

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