नई दिल्ली, 13 जनवरी (khabarwala24)। भारतीय सशस्त्र बल शत्रु से देश की रक्षा तो करते ही हैं लेकिन अब नौसेना की एक पहल के अंतर्गत नागरिकों को गंभीर रोगों से बचाने की पहल भी की गई है। इसके अंतर्गत कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी सहित अनेक सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं में परामर्श, जांच तथा उपचार प्रदान किया जा रहा है।
यह पहल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप संघ में की गई है। यहां संयुक्त सेवाओं का बहु-विशेषज्ञ मेगा मेडिकल एवं सर्जिकल शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह शिविर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की परिकल्पना के अनुरूप आयोजित किया गया है। 13 जनवरी को कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में इसका औपचारिक उद्घाटन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने किया। यह कैंप 17 जनवरी तक चलेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक विशाल पैमाने का इस चिकित्सा शिविर का आयोजन भारतीय नौसेना द्वारा किया गया है। यह दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि व्यापक स्वास्थ्य जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप तथा निशुल्क दवाओं का वितरण द्वीप समुदाय के लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करेगा।
भारतीय नौसेना द्वारा यह बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर लक्षद्वीप के पांच द्वीपों अमीनी, एंड्रॉथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य द्वीपवासियों को व्यापक, सुलभ और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। पांच दिवसीय इस शिविर में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी सहित अनेक बुनियादी एवं सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं में परामर्श, जांच तथा उपचार प्रदान किया जा रहा है। कवरत्ती में विशेष रूप से तैनात नेत्र विज्ञान टीम द्वारा पात्र रोगियों के लिए मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत देश के सबसे दूरदराज क्षेत्रों में भी प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। यह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की भावना को प्रतिबिंबित कर रहा है। नौसेना के मुताबिक, साथ ही यह शिविर ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन के अनुरूप उपचारात्मक, निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय प्रस्तुत कर रहा है।
एक वीडियो संदेश के माध्यम से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बड़े पैमाने के चिकित्सा शिविर के आयोजन के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में नागरिकों के निकट गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि यह पहल तीन दृष्टियों से अनूठी है। पहला, समन्वय, जिसमें तीनों सशस्त्र सेवाओं और स्थानीय प्रशासन के विशेषज्ञ एक साथ कार्य कर रहे हैं।
दूसरा, विस्तार, जिसमें कार्डियोलॉजी, नेत्र विज्ञान, मोतियाबिंद शल्यक्रिया, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, त्वचा रोग और एंडोक्राइनोलॉजी जैसे अनेक विशेषज्ञ शामिल हैं। तीसरे पैमाने में बड़ी संख्या में चिकित्सा विशेषज्ञ और सहायक स्टाफ तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संयुक्त प्रयास अंतर-सेवा समन्वय और नागरिक–सैन्य सहयोग को मजबूत करते हैं।
नौसेना प्रमुख ने यहां रोगियों से संवाद भी किया और मोतियाबिंद ऑपरेशन से लाभान्वित मरीजों को चश्मे, आई ड्रॉप्स और दवाएं वितरित कीं। इस शिविर के अंतर्गत देशभर के विभिन्न रक्षा चिकित्सा प्रतिष्ठानों से 29 मेडिकल अधिकारी, दो नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की गई है। लक्षद्वीप में पहले से विद्यमान जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को पूरक समर्थन देने हेतु आधुनिक चिकित्सा उपकरण, आवश्यक स्टोर और दवाओं की आपूर्ति बढ़ाई गई है।
अगत्ती और मिनिकॉय में ऑपरेटिव और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के लिए समर्पित सर्जिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। चिकित्सकीय उपचार के साथ-साथ शिविर में समग्र स्वास्थ्य पर विशेष बल दिया गया। यह बहु-विशेषज्ञ मेडिकल शिविर भारतीय नौसेना और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की कर्तव्य से परे सेवा-भावना तथा लक्षद्वीप के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।
–khabarwala24
जीसीबी/एएस
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