नई दिल्ली, 29 जनवरी (khabarwala24)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विनियम, 2026 पर उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाए गए स्थगन आदेश का स्वागत किया है। अभाविप का कहना है कि यह आदेश देशभर में यूजीसी समता नियमों को लेकर फैली अस्पष्टता और भ्रम को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संगठन के मुताबिक, यह निर्णय संविधान में निहित समता और समानता के मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप है तथा अभाविप द्वारा पूर्व में जारी वक्तव्य में उठाई गई स्पष्टीकरण की मांगों के भी अनुरूप है। स्थगन आदेश के साथ ही इस विषय से जुड़े वर्ष 2012 के विनियम यथावत लागू रहेंगे।
अभाविप का मानना है कि यूजीसी और सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र की उस अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहां प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने। यह बात अभाविप ने अपने पूर्व वक्तव्य में भी स्पष्ट करते हुए जारी किए गए विनियम पर स्पष्टता और संतुलन बनाए रखने की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ द्वारा इस निर्णय की काफी आवश्यकता थी क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में इस विनियम को लेकर काफी भ्रांति भी फैली थी, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों के मध्य वैमनस्य पैदा होने की आशंका थी। अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि शैक्षिक परिसर में सदैव ही सकारात्मक, भेदभावमुक्त एवं समता युक्त परिवेश रहे और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा मिले।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “उच्चतम न्यायालय का यूजीसी रेगुलेशन पर स्थगन का आदेश स्वागतयोग्य है। अभाविप सदैव से शैक्षणिक परिसरों में समता, सौहार्द एवं समान अवसरों की पक्षधर रही है। यूजीसी द्वारा जारी किए गए विनियमों में स्पष्टता एवं संतुलन का अभाव छात्रों के बीच भ्रम और असंतोष को जन्म दे सकता है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप समयोचित है और इससे संवाद व विमर्श के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनेगा। अभाविप सभी वर्गों, छात्रों एवं शिक्षण संस्थानों से अपील करती है कि वे शांति, संयम और सौहार्द बनाए रखें तथा राष्ट्रहित में रचनात्मक संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।”
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