नई दिल्ली, 12 फरवरी (khabarwala24)। नई दिल्ली में एक अहम क्यूए इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है। इस कॉन्क्लेव में नौसेना, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत मिलकर जहाज निर्माण व संबंधित उपकरणों से जुड़ी भविष्य की रणनीति पर मंथन करेंगे।
रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आज गुणवत्ता सिर्फ एक तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भरोसे का आधार बन चुकी है। युद्धपोत हो, कॉम्बैट सिस्टम हो या स्पेयर पार्ट, हर उपकरण की विश्वसनीयता सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि समुद्री जहाज, उपकरण और सिस्टम उच्च गुणवत्ता वाले हों। इसी मुद्दे पर यह क्वालिटी एश्योरेंस इंडस्ट्री कॉन्क्लेव 13 फरवरी को होने जा रहा है।
नई दिल्ली के मानेकशॉ ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम की थीम ‘ट्रेसबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट- टेक्नोलॉजी के जरिए स्मार्ट क्वालिटी एश्योरेंस’ है। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना, क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसियां, शिपयार्ड, रक्षा पीएसयू और निजी कंपनियों के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। इनका मकसद रक्षा निर्माण में गुणवत्ता की प्रक्रिया को ज्यादा मजबूत, तेज और पारदर्शी बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में सिर्फ सामान बनाना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि हर पार्ट की पूरी जानकारी ट्रैक की जा सके, मसलन वह कहां बना, कैसे बना और किस स्टेज पर जांच हुई। डिजिटल तकनीक की मदद से इस पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जा सकता है। कॉन्क्लेव में इसी पर चर्चा होगी कि कैसे टेक्नोलॉजी के जरिए मंजूरी और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया तेज की जाए और इंडस्ट्री व नौसेना के बीच भरोसा और मजबूत किया जाए।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यहां तकनीकी सत्रों में खास तौर पर जहाज निर्माण में डिजिटल क्वालिटी सिस्टम, नीतियों का पालन, इंडस्ट्री के साथ तालमेल और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई में गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कोशिश यह रहेगी कि जहाज बनाने से लेकर उनके रखरखाव तक हर स्तर पर गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। इस दौरान कुछ अहम पहल भी शुरू की जाएंगी। ‘इंडियन नेवल एंड मरीन इंडस्ट्री- ए कैपेबिलिटी कैटलॉग’ जारी किया जाएगा।
इससे इंडस्ट्री की क्षमता की पूरी जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी। साथ ही कॉम्बैट सिस्टम और सेंसर से जुड़े डेटा को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए संयुक्त दिशा-निर्देश जारी होंगे। जिन कंपनियों का क्वालिटी रिकॉर्ड अच्छा है, उन्हें ‘ग्रीन चैनल स्टेटस’ और ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि उनकी मंजूरी प्रक्रिया तेज हो सके। यह कॉन्क्लेव रक्षा निर्माण को ज्यादा आधुनिक, डिजिटल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की साख भी वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।
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