वित्त मंत्री सीतारमण आज संसद में पेश करेंगी केंद्रीय बजट 2026-27; विकास और वित्तीय अनुशासन पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, 1 फरवरी (khabarwala24)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह एक ऐतिहासिक मौका होगा, क्योंकि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।यह सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री […]

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नई दिल्ली, 1 फरवरी (khabarwala24)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह एक ऐतिहासिक मौका होगा, क्योंकि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।

यह सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी। यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का 15वां बजट भी होगा। साल 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट है।

यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। देश के भीतर मांग अब भी बनी हुई है और महंगाई पहले के मुकाबले कुछ कम हुई है, लेकिन वैश्विक माहौल अभी भी बहुत अनिश्चित बना हुआ है।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बड़े केंद्रीय बैंकों की अलग-अलग मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ता बंटवारा अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। इससे बाजारों में हलचल बढ़ी है, विदेशी निवेशकों का पैसा निकल रहा है और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।

अब तक आयकर और जीएसटी में बड़ी कटौती, बुनियादी ढांचे पर ज्यादा खर्च और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कमी से अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिली है। हालांकि, कर में कटौती के कारण सरकार राजस्व भी घटा है, जिससे नए बजट में विकास को समर्थन देने के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश कम हो गई है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार का बजट रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च, बिजली और सस्ते आवास पर खास ध्यान देगा। साथ ही सामाजिक योजनाओं और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी। सरकार का लक्ष्य विकास की रफ्तार बनाए रखना होगा, लेकिन साथ ही वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखना भी जरूरी होगा।

सरकार ने कोविड काल के दौरान 9.2 प्रतिशत तक पहुंचे वित्तीय घाटे को धीरे-धीरे कम कर वर्ष 2026 में अनुमानित 4.4 प्रतिशत तक ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रास्ते से ज्यादा भटकाव नहीं होगा।

वर्ष 2026 के बजट में जहां मध्यम वर्ग की खपत बढ़ाने पर ज्यादा जोर था, वहीं इस बार खपत को बढ़ाने की नीति ज्यादा सीमित और लक्ष्य आधारित हो सकती है। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों के अनुसार बजट में ग्रोथ बनाए रखने और फिस्कल डिसिप्लिन बनाए रखने के बीच सावधानी से संतुलन बनाने की संभावना है, साथ ही ये वैश्विक राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता से पैदा हुई चुनौतियों का भी समाधान तलाशेगा।

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