कर्नाटक के मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा पर भ्रष्टाचार व भूमि अतिक्रमण का आरोप, भाजपा ने मांगा इस्तीफा

बेलगावी, 17 दिसंबर (khabarwala24)। कर्नाटक भाजपा ने बुधवार को राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा पर भूमि अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग की। भाजपा ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़ और वीडियो भी जारी किए।भाजपा कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु की ब्यातरायनपुरा विधानसभा क्षेत्र में मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा […]

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बेलगावी, 17 दिसंबर (khabarwala24)। कर्नाटक भाजपा ने बुधवार को राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा पर भूमि अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग की। भाजपा ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़ और वीडियो भी जारी किए।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु की ब्यातरायनपुरा विधानसभा क्षेत्र में मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी का आरोप है कि मंत्री ने कोलार जिले में स्थित 21 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा किया है, जो मूल रूप से एक झील और श्मशान भूमि थी।

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उल्लेखनीय है कि कृष्णा बायरेगौड़ा ब्यातरायनपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि कोलार उनका गृह जिला है।

बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, उन्हें बसों में बैठाकर एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

इस बीच, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवादी नारायणस्वामी ने मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने भ्रष्टाचार करते हुए कब्रिस्तान की जमीन और टैंक (झील) की भूमि को अवैध रूप से अपने नाम स्थानांतरित कराया।

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बेलगावी में मीडिया को संबोधित करते हुए नारायणस्वामी ने दस्तावेज़ जारी किए और आरोप लगाया कि मंत्री ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर कोलार जिले के नरसापुरा होबली के गरुडनापल्या गांव में स्थित सर्वे नंबर 47 की एक एकड़ कब्रिस्तान भूमि और सर्वे नंबर 46 की 20 एकड़ 16 गुंटा टैंक भूमि अपने नाम करवाई।

उन्होंने कहा कि इस जमीन की कुल कीमत करीब 100 से 120 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

नारायणस्वामी ने कहा, “यह भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है। मंत्री की यह हरकत कर्नाटक की जनता का अपमान है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर जांच का सामना करना चाहिए।”

उन्होंने सवाल उठाया कि कब्रिस्तान और टैंक जैसी संरक्षित भूमि को मंत्री ने किस तरह अपने नाम स्थानांतरित करा लिया, जबकि यह कानून के तहत संरक्षित होती है।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री के पिता, दिवंगत सी. बायरेगौड़ा, ने दस्तावेजों में हेरफेर कर इस जमीन को परिवार के नाम करवाया था।

नारायणस्वामी ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने और भूमि को वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी, “कर्नाटक की जनता भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंत्री तुरंत इस्तीफा नहीं देते हैं, तो विपक्ष इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेगा। “हम अदालत में लड़ाई लड़ेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मंत्री को न्याय के कटघरे में लाया जाए,” उन्होंने कहा।

इन आरोपों से राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है और सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतिबद्धता तथा सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि, मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।

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