हिजाब विवाद: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बचाव में उतरे बिहार के मंत्री जमा खान

पटना, 17 दिसंबर (khabarwala24)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक सार्वजनिक समारोह के दौरान एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की घटना के बाद भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।विवाद के बीच बिहार सरकार में मंत्री जमा खान ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस कृत्य के पीछे कोई गलत […]

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पटना, 17 दिसंबर (khabarwala24)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक सार्वजनिक समारोह के दौरान एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की घटना के बाद भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

विवाद के बीच बिहार सरकार में मंत्री जमा खान ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस कृत्य के पीछे कोई गलत इरादा नहीं था।

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जमा खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सीएम नीतीश कुमार को सब जानते हैं। वे समाज के हर वर्ग के लिए काम करते हैं। महिला डॉक्टर उनकी बेटी जैसी है। नीतीश कुमार ने पिता या अभिभावक की तरह व्यवहार किया। उन्हें गर्व महसूस हो रहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी ने उनकी सरकार में सफलता हासिल की है।

खान ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का अनावश्यक रूप से राजनीतिकरण कर रहा है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ लोग बिना किसी कारण के नीतीश कुमार पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।

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जमा खान ने हिजाब विवाद के संबंध में मुख्यमंत्री को कथित तौर पर एक पाकिस्तानी डॉन द्वारा दी गई धमकी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह भारत है। लोग धमकियां दे सकते हैं, लेकिन उनका कोई मतलब नहीं है। हम भारतीय हैं, और हम किसी से नहीं डरते।

दरअसल, यह विवाद 15 दिसंबर को तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद हॉल में 1,283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे भी समारोह के दौरान मंच पर मौजूद थे।

इस घटना के बाद फिल्म अभिनेत्री राखी सावंत समेत कई लोगों ने मुख्यमंत्री की आलोचना की है। इसके अलावा, एक महिला ने लखनऊ के एक पुलिस स्टेशन में नीतीश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

विरोध के चलते इस मामले में शामिल महिला डॉक्टर नुसरत परवीन ने अस्थायी रूप से बिहार छोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए कोलकाता गई हैं।

सूत्रों का कहना है कि घटना के एक दिन बाद ही उन्होंने राज्य छोड़ दिया। डॉ. नुसरत परवीन लंबे समय से डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखती थीं और 20 दिसंबर को सरकारी नौकरी में शामिल होने वाली थीं। हालांकि, विवाद के बाद के घटनाक्रमों ने उनकी सुरक्षा और सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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