तमिलनाडु में चक्रवात से बर्बाद फसलों के सर्वे में देरी ने किसानों की चिंता बढ़ाई

चेन्नई, 15 दिसंबर (khabarwala24)। तमिलनाडु में मानसून और चक्रवात से बर्बाद फसलों के सर्वेक्षण में देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ाई हैं। फसलों के नुकसान का आकलन न होने की स्थिति में किसानों को मुआवजे और कृषि गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।किसानों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद तमिलनाडु सरकार […]

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चेन्नई, 15 दिसंबर (khabarwala24)। तमिलनाडु में मानसून और चक्रवात से बर्बाद फसलों के सर्वेक्षण में देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ाई हैं। फसलों के नुकसान का आकलन न होने की स्थिति में किसानों को मुआवजे और कृषि गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

किसानों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद तमिलनाडु सरकार ने फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए एक मोबाइल ऐप के इस्तेमाल को कम करने का फैसला लिया। इसके बजाय कुछ जगहों पर मैनुअल सर्वे का विकल्प चुना है। किसान सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन वे आशंकित हैं कि आकलन समय पर पूरा होगा या नहीं और बिना किसी देरी के मुआवजा जारी किया जाएगा या नहीं।

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किसानों का कहना है कि आकलन की गति धीमी और असमान बनी हुई है। कई लोग प्रक्रिया पूरी होने से पहले अपनी जमीनों पर दोबारा काम शुरू करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें डर है कि इससे नुकसान के वेरिफिकेशन और मुआवजे की पात्रता पर असर पड़ सकता है।

कर्मचारियों की कमी ने समस्या को और बढ़ा दिया है। आकलन के लिए जिम्मेदार सहायक कृषि अधिकारियों को कथित तौर पर कई राजस्व गांवों का काम सौंपा गया है, जिससे सर्वे जल्दी और सही तरीके से पूरा करना मुश्किल हो गया है। किसानों ने कहा कि प्रति अधिकारी काम का बोझ अवास्तविक है।

किसानों ने बताया कि नागपट्टिनम, तिरुवरूर, मयिलादुथुराई, तंजावुर और पुडुकोट्टई जैसे कई इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। नागापट्टिनम सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां 36 घंटे के भीतर लगभग 300 मिमी बारिश दर्ज की गई।

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डेल्टा जिलों में भारी बारिश ने सांबा और थलाडी की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे लगभग 90 हजार हेक्टेयर (यानी करीब 2.22 लाख एकड़) फसलें डूब गईं। कई इलाकों में बारिश के बाद एक हफ्ते से ज्यादा समय तक पानी जमा रहा, जिससे बड़े पैमाने पर फसलें खराब हो गईं।

सरकार ने अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में एक अपग्रेडेड ऐप-आधारित जीपीएस वेरिफिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करके फसल के नुकसान के आकलन का आदेश दिया था। हालांकि, नेटवर्क फेलियर जैसी तकनीकी समस्याओं और जमीनी स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयों ने प्रक्रिया को काफी धीमा कर दिया।

देरी के कारण डेल्टा के किसानों ने जीपीएस वेरिफिकेशन की बजाय पारंपरिक सिस्टम पर लौटने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह नया तरीका आपदा की स्थिति में उपयुक्त नहीं था। लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार मैनुअल सर्वे पर लौट आई, लेकिन हर जिले में कम से कम 10 प्रतिशत ऐप-आधारित वेरिफिकेशन को अनिवार्य रखा गया।

हालांकि, राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब इस प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास जारी हैं। कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नॉन-डेल्टा जिलों से अतिरिक्त सहायक कृषि अधिकारियों को तैनात किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि सर्वे का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो गया है और बाकी काम जल्द पूरे होने की उम्मीद है, जिसके बाद मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और फिर किसान अपने खेतों को अगले कृषि चक्र के लिए तैयार कर सकेंगे।

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