नई दिल्ली, 17 दिसंबर (khabarwala24)। देश की राजधानी दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं। सरकार ने निर्माण कार्य रुकने से प्रभावित रजिस्टर्ड और वेरिफाइड निर्माण मजदूरों के खातों में 10 हजार रुपए भेजने का फैसला लिया है। इसके अलावा, आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने का फैसला लिया है।
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने सरकार के इस फैसले की जानकारी दी।
कपिल मिश्रा ने कहा कि ग्रैप के तीसरे चरण के दौरान कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था। सरकार के इस फैसले से दिहाड़ी पर काम करने वाले कंस्ट्रक्शन मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा था। मजदूरों को राहत देने के लिए सरकार सभी रजिस्टर्ड और वेरिफाइड मजदूरों को डीबीटी के जरिए मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपए ट्रांसफर करेगी।
उन्होंने आगे कहा कि ग्रैप के चौथे चरण के तहत भी यही मुआवजा दिया जाएगा। कंस्ट्रक्शन मजदूरों से अपील है कि वे पेमेंट पाने के लिए जल्द से जल्द वेरिफिकेशन के लिए दिल्ली सरकार के पोर्टल पर रजिस्टर करें। इस कदम का मकसद प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों से प्रभावित मजदूरों की मदद करना है।
कपिल मिश्रा ने कहा कि इसके अलावा, एनसीटी दिल्ली के सभी प्राइवेट ऑफिस 50 फीसदी से ज्यादा स्टाफ के साथ काम नहीं करेंगे, जबकि बाकी स्टाफ घर से काम करेगा। यह गाइडलाइन लेबर डिपार्टमेंट ने जारी की है। 50 फीसदी अटेंडेंस को जरूरी करने के साथ-साथ, ऑफिसों को फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि सभी स्टाफ का एक ही समय पर आना और जाना जरूरी नहीं है, टाइमिंग अलग-अलग होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्रुप को सुबह 10 बजे बुलाया जाता है और सभी एक ही जगह से एक ही डेस्टिनेशन पर आ रहे हैं, तो उन्हें अलग-अलग समय पर लौटना चाहिए। ये गाइडलाइन सुचारू रूप से लागू करने के लिए जारी की जा रही हैं।
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