पटना, 27 दिसंबर (khabarwala24)। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में भूमि सुधार की दिशा में एक बड़ी पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शनिवार से बिहार में बंटवारा दाखिल खारिज की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
यह पहल ‘सुशासन से समृद्धि की ओर-विकसित बिहार, विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया अहम कदम है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि डबल इंजन की सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में बंटवारा दाखिल-खारिज पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिससे अब जमीन का बंटवारा पहले से कहीं ज्यादा आसान, पारदर्शी और तेज हो जाएगा।
विजय सिन्हा ने बताया कि अब तक जमीन के बंटवारे के बाद हर हिस्सेदार को अलग-अलग दाखिल खारिज कराना पड़ता था। यह प्रक्रिया जटिल थी और इसमें समय भी अधिक लगता था। इस कारण आम लोगों को परेशानी होती थी और कई बार विवाद भी खड़े हो जाते थे।
उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे एक ही दाखिल खारिज के जरिए सभी हिस्सेदारों के नाम उनकी-उनकी जमीन की जमाबंदी कायम हो सके।
डिप्टी सीएम ने बताया कि मुख्य सचिव सीके अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने तेजी से काम किया। उन्हें खुशी है कि बहुत कम समय में यह नई प्रणाली लागू कर दी गई है।
विजय सिन्हा ने लोगों से अपील की कि जिन परिवारों में अब तक मौखिक बंटवारा हुआ है, वे इस सुविधा का लाभ उठाकर अपनी जमीन का कानूनी दस्तावेजीकरण जरूर कराएं।
उन्होंने कहा कि मौखिक बंटवारा आगे चलकर पारिवारिक भूमि विवाद का कारण बनता है, जिससे लोग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से भी वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दलाल और बिचौलिए फायदा उठाते हैं और ये विवाद अदालतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे न्यायालयों पर मुकदमों का भारी बोझ बढ़ता है।
डिप्टी सीएम ने बताया कि अगस्त-सितंबर में चले राजस्व महाअभियान के दौरान करीब 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 40 लाख से अधिक आवेदन पारिवारिक भूमि विवाद और बंटवारे से जुड़े थे। इससे साफ है कि यह समस्या कितनी गंभीर है।
विजय सिन्हा ने कहा कि दाखिल खारिज, परिमार्जन प्लस और नापी जैसी प्रक्रियाओं को विभाग ने प्राथमिकता दी है। यदि इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो बिहार में भूमि विवाद, आपसी रंजिश, वैमनस्य, और फर्जी दस्तावेजों से पैदा होने वाला सामाजिक तनाव काफी हद तक खत्म हो जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इस पहल को भटकाने और इसका गलत अर्थ निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार पूरी ईमानदारी से आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिप्टी सीएम ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को भूमि विवाद से मुक्त और सुशासित राज्य बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
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