अयोध्या: रामपथ पर गूंजा मानस, भक्तिरस में डूबी अयोध्या

अयोध्या, 2 जनवरी (khabarwala24)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के पांचवें दिन अयोध्या पूरी तरह राममय हो उठी। श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड का सस्वर, संगीतमय पाठ जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे रामपथ पर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा की अविरल धारा बहती रही।महोत्सव के पांचवें दिन श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के आठवें विश्राम […]

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अयोध्या, 2 जनवरी (khabarwala24)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के पांचवें दिन अयोध्या पूरी तरह राममय हो उठी। श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड का सस्वर, संगीतमय पाठ जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे रामपथ पर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा की अविरल धारा बहती रही।

महोत्सव के पांचवें दिन श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के आठवें विश्राम के पश्चात “अवधपुरी अति रुचिर बनाई… से आगे के प्रसंग का भावपूर्ण पाठ प्रारम्भ हुआ। मानस की चौपाइयों की गूंज ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से पूरे रामपथ पर फैलती रही, जिसमें उपस्थित मानस प्रेमी श्रोता भी गायक दल के साथ सस्वर सहभागी बने। श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार, कानपुर द्वारा “सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़उं अनुग्रह तोरे” संपुट के साथ उत्तरकाण्ड का पाठ किया गया।

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कानपुर से पधारे व्यास योगेश भसीन ने आठवें विश्राम से आगे मानस पाठ का सजीव व भावमय वाचन किया। यजमान और श्रद्धालु पूर्ण भक्तिभाव में डूबकर पाठ में तल्लीन रहे। कार्यक्रम के दौरान मानस का अंतिम श्लोक—“पुण्यं पापहरं सदाशिवकरं विज्ञान भक्तिप्रदमं…”—तक सस्वर परायण ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। 23 सदस्यों की टीम द्वारा क्रमबद्ध एवं संगीतमय प्रस्तुति दी गई।

मानस पाठ के उपरांत हनुमान चालीसा का पाठ, तत्पश्चात श्रीराम लला की आरती “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन…” तथा अंत में मानस आरती “आरती श्रीरामायण जी की…” सम्पन्न हुई। समापन अवसर पर ट्रस्ट के महासचिव चम्पतराय ने प्रतिष्ठा द्वादशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार, कानपुर का परायण हेतु आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर चम्पतराय एवं गोपाल राव ने मानस परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में मानस प्रेमी श्रोता भी गायक टीम के साथ रामचरितमानस का पाठ करते रहे। ध्वनि विस्तारक यंत्रों से पूरे राम पथ पर मानस की चौपाईया गूंजती रहीं। संगीतमय श्री रामचरितमानस पाठ 23 सदस्यों द्वारा क्रमशः प्रस्तुत किया गया। मानस पाठ के बाद हनुमानचालीसा पाठ, श्रीराम लला की आरती “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम,” और मानस की आरती “आरती श्रीरामायण जी की…” के बाद विश्राम लिया गया।

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