जयंती विशेष : जब किशोर कुमार से 18 साल तक नाराज रहे रेडियो के ‘स्वर्णिम स्वर’, ऐसे हुई दोबारा दोस्ती

मुंबई, 20 दिसंबर (khabarwala24)। रेडियो की दुनिया के दिग्गज अमीन सयानी की 21 दिसंबर को जयंती है। उनकी मधुर आवाज और अनोखी शैली ‘बहनों और भाइयों’ ने लाखों श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई। अमीन सयानी ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे एशिया में ख्याति अर्जित की।उनका सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम ‘बिनाका गीतमाला’ था, जो साल […]

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मुंबई, 20 दिसंबर (khabarwala24)। रेडियो की दुनिया के दिग्गज अमीन सयानी की 21 दिसंबर को जयंती है। उनकी मधुर आवाज और अनोखी शैली ‘बहनों और भाइयों’ ने लाखों श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई। अमीन सयानी ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे एशिया में ख्याति अर्जित की।

उनका सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम ‘बिनाका गीतमाला’ था, जो साल 1952 से शुरू होकर 42 साल तक चला। यह रेडियो शो हिंदी फिल्म संगीत की हिट लिस्ट पेश करता था। रेडियो सीलोन (अब श्रीलंका) से प्रसारित यह कार्यक्रम इतना हिट हुआ कि हर सप्ताह हजारों पत्र आते थे। अमीन ने 50 हजार से ज्यादा रेडियो कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि उनके करियर की नींव 9 साल की उम्र में पड़ी थी, जब उनके भाई हमीद सयानी उन्हें ऑल इंडिया रेडियो के बॉम्बे स्टेशन ले गए और वहां अपनी आवाज रिकॉर्ड कर सुनी। 1952 में ‘बिनाका गीतमाला’ की शुरुआत के साथ वह घर-घर लोकप्रिय हो गए। उनकी आवाज में गर्माहट और श्रोताओं से सीधा संवाद करने की शैली ने उन्हें अनोखा बनाया।

‘आवाज के जादूगर’ अमीन सयानी और अपने गाए गानों से श्रोताओं के दिलों पर खास छाप छोड़ने वाले गायक किशोर कुमार की दोस्ती भी मशहूर थी। दोनों कॉलेज के दोस्त थे। एक इंटरव्यू में अमीन ने बताया था, “एक बार ‘गीतमाला’ में किशोर का गाना टॉप पर था। एक कॉलेज के एनुअल प्रोग्राम के लिए किशोर को बुलाना था। फोन करने पर किशोर ने कहा कि अंधेरी स्टूडियो में शूटिंग के दौरान आ जाना। मैं भारी रेडियो मशीन लेकर स्टूडियो पहुंचा तो निर्देशक दरवाजे पर खड़े थे। मैंने पूछा क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि किशोर ने कहा है – अमीन के जाने के बाद ही वह शूटिंग के लिए आएंगे।”

अमीन को यह बात बहुत बुरी लगी। वह बोले, “मुझे अच्छा नहीं लगा, मेरा पुराना दोस्त, और ऐसी बात! इसके बाद मैंने किशोर से 18 साल तक बात नहीं की। फिर एक दिन किशोर का फोन आया कि मेरी फिल्म के लिए इंटरव्यू कर दो। मैंने कहा, ‘ठीक है, आ जाओ।’ स्टूडियो में किशोर बैठे तो मुझे पुराना किस्सा याद आ गया। मैंने गंभीरता से कहा, ‘सावधान, किशोर कुमार! मैंने बाहर दो पहलवान खड़े कर दिए हैं, जो आपको तब तक नहीं जाने देंगे जब तक आप एक और इंटरव्यू रिकॉर्ड नहीं कर लेते। किशोर पहले डर गए, फिर मजाक समझकर हंस पड़े और बोले, ‘तुम भी क्या याद करोगे, चलो कर लेना एक और प्रोग्राम रिकॉर्ड।’

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सयानी ने आगे बताया, “उस प्रोग्राम में किशोर ने कमाल कर दिया था। उन्होंने चार अलग-अलग आवाजें निकालीं- पहली अपने बचपन की, फिर जवानी की, बुढ़ापे की, और चौथी एक जज की। साथ ही स्टार की मिमिक्री की। तीनों का इंटरव्यू खुद ही किया। यह प्रोग्राम श्रोताओं में बेहद लोकप्रिय हुआ।”

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