मुंबई, 10 नवंबर (khabarwala24)। बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया में हर किसी का सपना कैमरे के सामने आने का होता है। कई लोग हीरो बनने की चाह लेकर इंडस्ट्री में कदम रखते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें किसी और दिशा में ले जाती है। कुछ ऐसा ही बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर के साथ हुआ।
आज वह इंडस्ट्री के सबसे सफल निर्माताओं में से एक माने जाते हैं, लेकिन कभी उन्होंने भी हीरो बनने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपने छोटे भाई अनिल कपूर के सपनों के लिए छोड़ दिया।
बोनी कपूर का जन्म 11 नवंबर 1953 को मुंबई में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा था। उनके पिता, सुरिंदर कपूर, एक मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर थे, जिन्होंने अपने बेटों को फिल्मों की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। अनिल कपूर और संजय कपूर दोनों बोनी कपूर के छोटे भाई हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बोनी के अंदर भी फिल्मी दुनिया का आकर्षण था, लेकिन उनका सफर दूसरों से थोड़ा अलग रहा।
बचपन से ही बोनी को फिल्मों से बेहद लगाव था। उन्होंने हमेशा यह सपना देखा कि एक दिन वह खुद भी बड़े पर्दे पर हीरो की तरह नजर आएंगे। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और लिखा था।
एक पुराने इंटरव्यू में बोनी कपूर ने बताया था कि वह भी एक्टर बनना चाहते थे, लेकिन उन्होंने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया क्योंकि उनके भाई अनिल कपूर इस सपने को लेकर उनसे कहीं ज्यादा गंभीर थे।
बोनी ने कहा था, ”मेरा मन एक्टर बनने का था, लेकिन पक्का इरादा नहीं किया था। अनिल एक्टर बनने के लिए मुझसे ज्यादा गंभीर था, तो मैंने सोचा कि किसी को तो उसके पीछे खड़ा रहना चाहिए।” इस तरह उन्होंने अपने भाई का करियर संवारने का फैसला किया और खुद कैमरे के पीछे चले गए।
बोनी कपूर ने करियर की शुरुआत पिता की प्रोडक्शन कंपनी से की। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों के निर्माण और मार्केटिंग को बारीकी से समझा। साल 1983 में उन्होंने अपने बैनर ‘नरगिस आर्ट्स’ के तहत फिल्म ‘वो सात दिन’ का निर्माण किया, जिसने उनके भाई अनिल कपूर को बतौर हीरो लॉन्च किया। फिल्म को जबरदस्त सराहना मिली और यहीं से अनिल कपूर का करियर चमक उठा।
बोनी कपूर को भी बतौर निर्माता पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक यादगार फिल्में बनाईं, जिसमें ‘मिस्टर इंडिया’, ‘जुदाई’, ‘नो एंट्री’, ‘वांटेड’, ‘पुकार’ और ‘कंपनी’ जैसी कई फिल्में शामिल हैं।
फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ बोनी कपूर के करियर की सबसे अहम फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में उनके भाई अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिकाओं में थे। कहा जाता है कि इसी फिल्म के दौरान बोनी कपूर और श्रीदेवी के बीच नजदीकियां बढ़ीं। बाद में दोनों ने शादी कर ली और उनकी दो बेटियां जान्हवी कपूर और खुशी कपूर हैं। आज जान्हवी बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हैं, जबकि खुशी भी फिल्मी दुनिया में नाम कमाने के लिए मेहनत कर रही हैं।
बोनी कपूर का करियर हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उनकी कुछ फिल्में बड़ी हिट साबित हुईं, तो कुछ बुरी तरह फ्लॉप भी रहीं। उन्होंने न सिर्फ हिंदी सिनेमा में, बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने तमिल फिल्म ‘नरकोंडा पारवाई’ और तेलुगु फिल्म ‘वकील साब’ का निर्माण किया, जो दोनों ही बड़ी हिट रहीं।
अपने लंबे करियर में बोनी कपूर को कई पुरस्कार और सम्मान भी मिले। उन्हें ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड मिला और ‘पुकार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया।
उनके जीवन में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब 2018 में उनकी पत्नी श्रीदेवी का दुबई में निधन हो गया। इस हादसे ने बोनी कपूर को तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज भी वे श्रीदेवी को अपनी प्रेरणा बताते हैं और उनके नाम को हमेशा गर्व से याद करते हैं।
Source : IANS
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