Silver Price Crash: चांदी में भारी तबाही मची हुई है। महज कुछ ही दिनों में एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव में करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है। बजट वाले दिन से शुरू हुई यह गिरावट सोमवार को भी जारी रही और निवेशकों का पैसा आधा से भी कम हो गया। जो लोग चांदी के 4 लाख के पार जाने पर खुश होकर निवेश कर रहे थे, उनकी मेहनत की कमाई पर पानी फिर गया। सोने में भी लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है, जिससे गोल्ड-सिल्वर क्रैश का माहौल बन गया है।
चांदी ने मचाई तबाही, 12% से ज्यादा की गिरावट
एमसीएक्स पर चांदी के भाव देखें तो हालात बहुत खराब हैं। 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी में 12 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। बजट से पहले गुरुवार को चांदी का भाव पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकला था और कारोबार खत्म होने पर यह 4,20,048 रुपये के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद से गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया।
बजट वाले दिन रविवार को चांदी का भाव 2,65,652 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। सोमवार को बाजार खुलते ही 15 प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और भाव गिरकर 2,25,805 रुपये प्रति किलो पर आ पहुंचा। यानी एक दिन में ही 39,847 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई। चार दिनों में कुल मिलाकर चांदी करीब 1,94,243 रुपये सस्ती हो चुकी है। जिन निवेशकों ने हाई लेवल पर चांदी काटी थी, उनका निवेश अब आधा से भी कम रह गया है।
सोना भी नहीं संभल पा रहा, हाई से 54 हजार की गिरावट
चांदी की गिरावट के साथ-साथ सोना भी बिखर रहा है। बजट वाले दिन सोने में भारी बिकवाली हुई और सोमवार को भी यह ट्रेंड जारी रहा। 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का भाव रविवार को 1,47,753 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को यह गिरकर 1,38,888 रुपये पर आ गया। यानी एक दिन में 8,865 रुपये की कमी।
पिछले सप्ताह गुरुवार को सोने ने भी नया हाई छुआ था, जहां यह 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अब इस हाई से सोने की कीमत में 54,208 रुपये की गिरावट आ चुकी है। निवेशक लगातार मुनाफा वसूल रहे हैं, जिससे कीमतें संभल नहीं पा रही हैं।
गोल्ड-सिल्वर क्रैश के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
गोल्ड और सिल्वर प्राइस क्रैश के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण ऊंचे भाव पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली है। पिछले महीनों में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर गई थीं, जिसके बाद बिकवाली शुरू हो गई। यह बिकवाली इतनी तेज हुई कि गिरावट पर ब्रेक नहीं लग पा रहा।
चांदी में इंडस्ट्रियल डिमांड कम होने से भी दबाव बढ़ा है। खासकर चीन और यूरोप में मांग घटी है, क्योंकि वहां इकोनॉमी में सुस्ती है। चांदी का बड़ा इस्तेमाल इंडस्ट्री में होता है, जैसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में।
एक और बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डोनाल्ड ट्रंप ने अगले यूएस फेड प्रमुख के रूप में जेरोम पॉवेल की जगह केविन वॉर्श को नामित करने की बात कही, जिसके बाद डॉलर में तेजी आई। मजबूत डॉलर से सोना-चांदी जैसे कमोडिटी पर दबाव पड़ता है, क्योंकि ये डॉलर में ट्रेड होती हैं। निवेशक डॉलर मजबूत होने पर प्रेसियस मेटल्स बेचकर डॉलर में शिफ्ट कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या सबक?
यह क्रैश दिखाता है कि कमोडिटी मार्केट में कितनी तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है। 1980 के दशक में भी चांदी में ऐसा ही बड़ा क्रैश देखा गया था। चीन का मुहावरा “सही समय 20 साल पहले था, दूसरा समय आज है” यहां फिट बैठता है, लेकिन आज का समय गिरावट का है। निवेशक सतर्क रहें, क्योंकि मुनाफावसूली और ग्लोबल फैक्टर्स से कीमतें और नीचे जा सकती हैं।
अगर आप सोना-चांदी में निवेश सोच रहे हैं, तो अभी इंतजार करें और मार्केट को स्थिर होने दें। बजट के बाद की यह गिरावट कई निवेशकों के लिए सबक है कि हाई पर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
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