Khabarwala 24 News New Delhi: Excise Duty on Tobacco Products सिगरेट पीने और पान मसाला खाने वालों के लिए आने वाला समय महंगा साबित हो सकता है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स को और सख्त करने का फैसला लिया है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी लागू की जाएगी, जिससे सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2020 को मंजूरी दी थी। इसके जरिए तंबाकू उत्पादों पर कर व्यवस्था को और कठोर बनाने का रास्ता साफ किया गया था। बुधवार रात जारी नोटिफिकेशन के साथ ही अब नई टैक्स व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है।
लंबाई के हिसाब से लगेगी सिगरेट पर ड्यूटी (Excise Duty on Tobacco Products)
नई व्यवस्था के तहत सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी उसकी लंबाई के आधार पर तय की जाएगी। यह ड्यूटी प्रति हजार सिगरेट 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक होगी। यानी जितनी लंबी सिगरेट, उतना ज्यादा टैक्स। इससे प्रीमियम और लॉन्ग साइज सिगरेट सबसे ज्यादा महंगी हो सकती हैं।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि तंबाकू उत्पादों की खपत को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर सख्त कदम उठाना भी है।
जीएसटी के अलावा लगेगा नया कर (Excise Duty on Tobacco Products)
अधिसूचना के अनुसार, तंबाकू और पान मसाला पर लगाए जाने वाले नए कर मौजूदा जीएसटी दरों के अतिरिक्त होंगे। ये नए प्रावधान अभी लगाए जा रहे GST Compensation Cess की जगह लेंगे।
1 फरवरी 2026 से
- सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला और इससे जुड़े उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी
- बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी
लागू होगा। इसके अलावा पान मसाला पर हेल्थ सेस और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लगाया जाएगा। तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी अलग से वसूली जाएगी, जिससे कुल टैक्स बोझ और बढ़ जाएगा।
किन शेयरों पर पड़ सकता है असर (Excise Duty on Tobacco Products)
इस फैसले का असर शेयर बाजार में तंबाकू सेक्टर की कंपनियों पर भी देखने को मिल सकता है।
- ITC Ltd: सिगरेट कारोबार से बड़ा रेवेन्यू आता है, इसलिए शॉर्ट टर्म में दबाव संभव
- Godfrey Phillips India: प्रीमियम सिगरेट पर टैक्स बढ़ने से मार्जिन पर असर
- VST Industries: लो-सेगमेंट सिगरेट पर असर सीमित, लेकिन वॉल्यूम दबाव में आ सकता है
- Dharampal Satyapal (DS Group) जैसी पान मसाला कंपनियों पर भी लागत बढ़ने का दबाव
हालांकि लॉन्ग टर्म में कंपनियां कीमत बढ़ाकर इस असर की भरपाई करने की कोशिश कर सकती हैं।
निष्कर्ष (Excise Duty on Tobacco Products)
सरकार के इस फैसले से उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही तंबाकू इंडस्ट्री और उससे जुड़े शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस पर रहेगी कि कंपनियां बढ़े टैक्स का असर कैसे मैनेज करती हैं।
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