Wednesday, February 21, 2024

Budget 2024 कम पैसे खर्च करने के बावजूद भी जबरदस्त ‘ग्रोथ’ करेगी इकोनॉमी, ये है सरकार का प्लान

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Khabarwala 24 News New Delhi : Budget 2024 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का बजट पेश कर चुकी हैं। इस साल सरकार ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर की ग्रोथ को बहुत लिमिटेड रखा है। इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य रखा है। कैपिटल एक्सपेंडिचर का फायदा ये होता है कि ये इकोनॉमी में मल्टीप्लायर इफेक्ट को जोड़ता है, जिसकी वजह से इकोनॉमी को लगभग 3 गुना फायदा मिलता है. लेकिन इसके बावजूद देश की इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़िया रहने का अनुमान है। ये मुमकिन कैसे होगा? चलिए समझते हैं…

11.1 प्रतिशत का इजाफा (Budget 2024)

सरकार ने इस साल के बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 11.1 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। ये वित्त वर्ष 2023-24 के बजट के मुकाबले 11.1 प्रतिशत का इजाफा है। इस तरह सरकार पिछले साल के मुकाबले अगले साल 1.1 लाख करोड़ रुपए अधिक खर्च करेगी।

17% की ग्रोथ दर्ज की है (Budget 2024)

बजट 2023-24 के संशोधित अनुमान पर देखें तो सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर में 17% की ग्रोथ दर्ज की है। संशोधित अनुमानों में कैपिटल एक्सपेंडिचर 2023-24 में 10 लाख करोड़ की बजाय 9.5 लाख करोड़ रुपए ही रहने वाला है। सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर तो बढ़ाने की बात कही है, तो फिर खर्च कम कहां और कैसे होगा।

कम खर्चा करेगी सरकार (Budget 2024)

सरकार ने 2023-24 में जब कैपिटल एक्सपेंडिचर का खर्च बढ़ाया था, तो वह 2022-23 की तुलना में 33.4% बढ़ा था, जबकि अबकी बार ये पिछले साल के मुकाबले महज 11.1 प्रतिशत ही बढ़ा है। इस लिहाज से देखा जाए तो सरकार अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर अब लिमिट कर रही है. आखिर ऐसा क्यों कर रही सरकार।

क्राउडिंग आउट के लिए (Budget 2024)

सरकार ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को लिमिटेड करने का फैसला इकोनॉमी में ‘क्राउडिंग आउट’ को रोकने के लिए लिया है। इसे ऐसे समझें जब इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त होती है, तब उसमें जान फूंकने के लिए सरकार अपना खर्च बढ़ाती है। इकोनॉमी को बूस्ट मिलता देख प्राइवेट सेक्टर को इकोनॉमी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

फंड कंट्रोल करने के लिए (Budget 2024)

जब इकोनॉमी में प्राइवेट इंवेस्टमेंट शुरू हो जाता है तो सरकार बाजार में फंड को कंट्रोल करने के लिए अपने हाथ वापस खींच लेती है ताकि प्राइवेट सेक्टर अपना निवेश वापस ना निकाले। प्राइवेट सेक्टर अगर अपना निवेश बाहर निकालता है तो उसे ‘क्राउडिंग आउट’ कहा जाता है. जबकि उसके इकोनॉमी में निवेश करने को ‘क्राउडिंग इन’ कहा जाता है।

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