Khabarwala 24 News Lucknow : UP News उत्तर प्रदेश में कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों के विलय को लेकर शिक्षक संघों और अभिभावकों के विरोध के बाद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने नए आदेश जारी किए हैं। एक किलोमीटर से अधिक दूरी वाले और 50 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों का विलय नहीं होगा। यह निर्णय विलय के बाद स्कूलों की दूरी बढ़ने की शिकायतों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो खासकर ग्रामीण बच्चों और लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच को मुश्किल बना रही थी।
विरोध के बाद नीति में बदलाव (UP News)
प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षक संगठनों और अभिभावकों ने विलय नीति का कड़ा विरोध किया। अभिभावकों ने शिकायत की कि विलय के बाद बच्चों को दूरस्थ स्कूलों में जाना पड़ रहा है, जो प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों और लड़कियों के लिए असुरक्षित है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने लोकभवन में कहा, “हमारा लक्ष्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना है। विलय का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग है, लेकिन बच्चों की सुविधा पहले है। इसलिए, एक किमी से अधिक दूरी और 50 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों को मर्ज नहीं किया जाएगा।”
स्कूलों की स्थिति में सुधार (UP News)
मंत्री ने बताया कि 2017 के बाद से परिषदीय स्कूलों में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। आज 96% स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
अन्य राज्यों में विलय का अनुभव (UP News)
संदीप सिंह ने कहा कि स्कूल विलय उत्तर प्रदेश में पहली बार नहीं हो रहा। राजस्थान (2014 में 20,000 स्कूल), मध्य प्रदेश (2018 में 36,000 स्कूल), उड़ीसा (2018-19 में 1,800 स्कूल), और हिमाचल प्रदेश (2022-24) में यह प्रक्रिया सफल रही है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूल क्लस्टरिंग को बढ़ावा देता है।
विरोध और कानूनी कार्रवाई (UP News)
विलय नीति के खिलाफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे दलित, पिछड़े और गरीब बच्चों के लिए हानिकारक बताया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को सीतापुर के 51 छात्रों की याचिका खारिज की। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई को सुनवाई स्वीकार की, अगली तारीख 21 अगस्त 2025 है।

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