Mata Chandraghanta नौ दिनों तक दुर्गा माता के नौरूपों की होती है पूजा, माता के 9 स्वरूपों में तीसरे दिन की देवी है माता चंद्रघंटा

Khabarwala 24 News New Delhi : Mata Chandraghanta नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि या शारदीय नवरात्र में दुर्गा माता के नौरूपों की पूजा होती है। माता के 9 स्वरूपों में तीसरे दिन की देवी है माता चंद्रघंटा। मां दुर्गा की तीसरी शक्ति हैं चंद्रघंटा। इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र […]

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Khabarwala 24 News New Delhi : Mata Chandraghanta नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि या शारदीय नवरात्र में दुर्गा माता के नौरूपों की पूजा होती है। माता के 9 स्वरूपों में तीसरे दिन की देवी है माता चंद्रघंटा। मां दुर्गा की तीसरी शक्ति हैं चंद्रघंटा। इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है। इसीलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा गया है। माता चंद्रघंटा का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के तीन नैत्र और दस हाथ हैं। इनके कर-कमल गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, खप्पर, चक्र और अस्त्र-शस्त्र हैं, अग्नि जैसे वर्ण वाली, ज्ञान से जगमगाने वाली दीप्तिमान देवी हैं चंद्रघंटा। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह ध्यान में रखकर साधना करनी चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है।

पापों से मुक्ति प्रदान करें मां | Mata Chandraghanta

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

मां चंद्रघंटा की कथा कहानी | Mata Chandraghanta

पौराणिक कथा के अनुसार जब दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा था। उस काल में महिषासुर का भयंकर युद्ध देवताओं से हो रहा था। महिषासुर देवराज देवलोक को अपने कब्जे में लेना चाहता था। जब देवताओं को उसकी इस इच्छा का पता चला तो वे विचलिता हो गए। सभी देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समक्ष पहुंचे। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की बात सुन क्रोध प्रकट किया। क्रोध आने पर उन तीनों के मुख से ऊर्जा निकली। उस ऊर्जा से एक देवी अवतरित हुईं। उस देवी को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा दिया। सूर्य ने अपना तेज और तलवार और सिंह प्रदान किया। इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर तका वध कर देवताओं की रक्षा की।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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