नई दिल्ली, 17 दिसंबर (khabarwala24)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि मजबूत विनिर्माण आधार और बढ़ते वैश्विक विस्तार के कारण भारत का दवा निर्यात 2024-25 में 30.47 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
दवा निर्यात पर एक दिवसीय क्षेत्रीय चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत का घरेलू दवा बाजार वर्तमान में लगभग 60 अरब डॉलर का है।
उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र के विशाल आकार, व्यापकता और नवाचार क्षमता को देखते हुए, बाजार के 2030 तक लगभग 130 अरब डॉलर तक होने की उम्मीद है।
वाणिज्य सचिव ने रेखांकित किया कि भारत आज मात्रा के हिसाब से विश्व का तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से चौदहवां सबसे बड़ा दवा उत्पादक है, जिसमें 3,000 से अधिक कंपनियां, 10,500 विनिर्माण इकाइयां और 60 चिकित्सीय क्षेत्रों में 60,000 से अधिक जेनेरिक ब्रांड शामिल हैं।
भारतीय दवाएं विश्व स्तर पर 200 से अधिक बाजारों तक पहुंचती हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक निर्यात सख्त नियामक व्यवस्था वाले देशों को होता है। भारत के दवा निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 34 प्रतिशत है, जबकि यूरोप का हिस्सा लगभग 19 प्रतिशत है।
चिंतन शिविर के दौरान हुई चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों, विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), को भारत के विकसित होते अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग ढांचे के प्रति जागरूक करना और औषधि निर्यात से संबंधित नीतिगत, नियामकीय और क्षमता-निर्माण पहलों के बारे में उद्योग जगत की जागरूकता बढ़ाना था।
वाणिज्य सचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में स्थापित करने और वैश्विक औषधि व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के दृष्टिकोण पर भी जोर दिया, जिससे विश्व भर में गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
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