Khabarwala 24 News New Delhi: cji of india राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक भव्य समारोह में जस्टिस सूर्यकांत को भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। जस्टिस बी.आर. गवई के रिटायरमेंट के बाद यह जिम्मेदारी संभालते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने संविधान की रक्षा करने और न्याय की मिसाल कायम करने की प्रतिज्ञा ली।
उनका कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा, जो 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट तक चलेगा। यह नियुक्ति 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब तत्कालीन CJI गवई ने उनका नाम सिफारिश किया था। जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के हिसार जिले के मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां उन्होंने छोटे शहर के वकील से शुरू कर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक का सफर तय किया है।
भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण मोड़ (cji of india)
यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट में 90,000 से ज्यादा केसों का पहाड़ जमा हो चुका है। शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा मेरी प्राथमिकता रहेगी। हम लंबित मामलों को कम करने और न्याय की पहुंच को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।” राष्ट्रपति मुर्मू ने भी अपने संबोधन में जस्टिस सूर्यकांत की अखंडता और संवेदनशीलता की सराहना की। आइए, जानें उनके जीवन, करियर और उन चर्चित फैसलों के बारे में जो उन्हें एक मजबूत जज बनाते हैं।
छोटे शहर से सुप्रीम कोर्ट तक: जस्टिस सूर्यकांत का प्रेरणादायक सफर (cji of india)
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक साधारण परिवार में हुआ। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1984 में हिसार जिला कोर्ट में वकालत शुरू की। 1985 में चंडीगढ़ शिफ्ट होकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की, जहां वे सीनियर एडवोकेट और हरियाणा के एडवोकेट जनरल भी रहे। 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कानून में एमए (फर्स्ट क्लास फर्स्ट) हासिल किया।
5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने, और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त हुए। उनके फैसलों में मानवाधिकार, जेंडर जस्टिस, शिक्षा और जेल सुधार पर खास जोर रहा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में ‘जसवीर सिंह जजमेंट’ जैसे फैसलों से जेल सुधारों को नई दिशा दी। वे इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट की कमेटियों के मेंबर भी हैं और कई नेशनल-इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा ले चुके हैं।
जस्टिस सूर्यकांत के 6 चर्चित फैसले: संविधान से लेकर लोकतंत्र तक की रक्षा (cji of india)
जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में 80 से ज्यादा फैसलों के लेखक रहे हैं और 1000 से अधिक बेंच का हिस्सा। उनके फैसलों ने राष्ट्रीय मुद्दों पर गहरा असर डाला है। यहां कुछ प्रमुख:
फैसला/मामला | विवरण | |
| अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण (2019-2023) | जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने वाले ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा। | |
| बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण (2025) | चुनाव आयोग को 65 लाख हटाए गए वोटर्स का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश। | |
| पेगासस स्पाइवेयर केस (2021) | इजराइली स्पाइवेयर से निगरानी की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट कमिटी गठित। | |
| लैंगिक न्याय और महिला सरपंच बहाली (2023) | गैरकानूनी हटाई गई महिला सरपंच को बहाल किया, जेंडर बायस उजागर। | |
| बार एसोसिएशन में महिला आरक्षण (2024) | सुप्रीम कोर्ट बार में 1/3 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व करने का निर्देश। | |
| वन रैंक-वन पेंशन (OROP) और महिलाओं का स्थायी कमीशन (2022-2025) | OROP को संवैधानिक मान्यता, सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन की सुनवाई। |
ये फैसले न सिर्फ कानूनी किताबों में दर्ज हैं, बल्कि सामाजिक न्याय की मिसाल भी। उदाहरण के लिए, पेगासस केस में उनकी बेंच ने कहा, “नागरिकों की प्राइवेसी पर सरकारी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं।” इसी तरह, बिहार वोटर लिस्ट केस में उन्होंने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया।
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