नई दिल्ली, 21 नवंबर (khabarwala24)। उत्तर-पूर्व दिल्ली में साल 2020 के दंगों से जुड़े सबसे बड़े यूएपीए केस की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। कोर्ट में आरोपी शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, मुहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद और शिफा-उर-रहमान की जमानत याचिकाओं पर लंबी सुनवाई हुई।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी रमण अंजारिया की बेंच के सामने दिल्ली पुलिस की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने दलील रखी। अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को साफ कहा कि यह मामला साधारण दंगा या सीएए के खिलाफ प्रदर्शन का नहीं, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर आतंकवादी गतिविधि और सत्ता परिवर्तन की सोची-समझी साजिश का है।
बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं का जिक्र कर पुलिस ने कहा, दंगाइयों का इरादा भारत में सत्ता पलट करना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर हिंसा भड़काई गई ताकि दुनिया में भारत की बदनामी हो।
एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट में कई वीडियो दिखाते हुए बताया कि दंगों में 53 लोग मारे गए, 513 से ज्यादा घायल हुए। फायरआर्म्स, पेट्रोल बम, एसिड, तलवारें, लाठियां और पत्थरों का खुलकर इस्तेमाल हुआ। हेड कांस्टेबल रतन लाल और आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई। पुलिसकर्मियों पर छतों से एसिड की बोतलें फेंकी गईं।
दूध-पानी की सप्लाई रोककर आर्थिक नाकेबंदी की कोशिश की गई। असम को भारत से काटने की बात कही गई, जिसका असर पश्चिम बंगाल तक पहुंचा, वहां ट्रेनों में आग लगाई गई और रेलवे को 70 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ।
पुलिस ने बताया कि यह सब पहले से प्लान किया गया था। 8 दिसंबर 2019 को योगेंद्र यादव की मौजूदगी में उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफी, मीरान हैदर समेत कई लोगों ने चक्का जाम और हिंसा की रणनीति बनाई।
13 दिसंबर को जामिया में हिंसा हुई, फिर शाहीन बाग में चक्का जाम शुरू कराया गया। 23 फरवरी 2020 की रात चांद बाग में फिर मीटिंग हुई जिसमें तय हुआ कि सीसीटीवी कैमरे खराब कर ज्यादा हिंसा की जाए। अगले दिन दोपहर 1 बजे पुलिस पर हमला हुआ, रतन लाल शहीद हो गए और दो वरिष्ठ आईपीएस अफसर गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस ने दावा किया कि ताहिर हुसैन ने शेल कंपनियों से 1.3 करोड़ रुपए की फंडिंग की और शिफा-उर-रहमान ने 8.90 लाख रुपए दिए। उमर खालिद ने “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे भड़काऊ भाषण दिए। शरजील इमाम ने असम को भारत से काटने की बात कही। गुलफिशा फातिमा मीटिंगों में मौजूद रहती थीं।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से बोली कि चार्जशीट में यूएपीए की धारा 16(ए) ए भी लगाई गई है, जिसमें मौत की सजा तक का प्रावधान है। ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है और इसे किसी ने चैलेंज नहीं किया। दो साल में ट्रायल पूरा हो सकता है बशर्ते आरोपी सहयोग करें। इसलिए अभी जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
Source : IANS
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