गांधीनगर, 29 अक्टूबर (khabarwala24)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत को डिजिटल गुड गवर्नेंस के माध्यम से साकार करते हुए, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में विकसित गुजरात 2047 से एक नया अध्याय रचने का संकल्प व्यक्त किया है।
उल्लेखनीय है कि इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधारों के लिए मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. हसमुख अढिया की अध्यक्षता में गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) का गठन किया है।
अब तक इस आयोग ने राज्य सरकार को चार सिफारिश रिपोर्टें सौंपी हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को जीएआरसी द्वारा 12 प्रमुख सिफारिशों के साथ तैयार की गई पांचवीं रिपोर्ट सौंपी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का ऐसा विचार देश को दिया है जिससे नागरिक केंद्रित सेवाएं सरल, सुगम और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने योग्य बन सकें।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपी गई जीएआरसी की पांचवीं रिपोर्ट में इस विचार के अनुरूप “वन स्टेट – वन पोर्टल” (एक राज्य – एक पोर्टल) पहल अपनाने की सिफारिश की गई है।
गुड गवर्नेंस के मॉडल स्टेट के रूप में प्रसिद्ध गुजरात में हर नागरिक को एक ही डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध कराने तथा ‘गवर्नमेंट ऐट द डोरस्टेप ऑफ सिटिजन’ के मंत्र को साकार करने की दिशा में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रिपोर्ट में यह भी अनुशंसा की गई है कि सिंगल साइन-ऑन सिस्टम (एसएसओ) के माध्यम से नागरिकों को एक ही यूजर आईडी से सभी सेवाएं मिलें। साथ ही, एक बार भरी गई जानकारी को आधार या डिजीलॉकर सेवाओं से जोड़कर विभिन्न सेवाओं में स्वतः उपयोग में लाने की व्यवस्था विकसित की जाए।
इससे नागरिकों को बार-बार वही जानकारी देने से मुक्ति मिलेगी और “एक बार जानकारी दें, अनेक बार लाभ पाएं” का उद्देश्य पूरा होगा।
जीएआरसी की इस पांचवीं रिपोर्ट का मुख्य फोकस डिजिटल गुजरात 2.0 पोर्टल विकसित करने पर है। इसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक कार्यप्रणाली पूरी तरह डिजिटल होगी और सरकार व नागरिकों के बीच संवाद और अधिक सुगम बनेगा।
इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि केवल नागरिकों के आवेदन की प्रतीक्षा करने के बजाय उनकी आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाकर स्मार्ट अलर्ट सिस्टम के माध्यम से नागरिकों को उनकी पात्रता के अनुसार सामाजिक कल्याण योजनाओं और लाइफ-साइकल आधारित मार्गदर्शन की जानकारी प्रदान की जाए ताकि एक सक्रिय, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण प्रणाली लागू हो सके।
रिपोर्ट में प्रमुख नागरिक सेवाओं के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो की भी अनुशंसा की गई है। इसमें यह सुझाव दिया गया है कि आवेदन, अनुमोदन और स्थिति अपडेट वास्तविक समय में उपलब्ध हों, जिससे पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़े। साथ ही, एक प्रमाणित फॉर्म अपनाकर अनावश्यक दस्तावेज़ों और स्टैम्प्स को समाप्त करते हुए “लेस पेपर-मोर फैसिलिटीज” के लक्ष्य को साकार किया जाए।
राज्य के सभी जनसेवा केंद्रों को आधुनिक बनाने, सेवाओं के लिए प्रतीक्षा समय घटाने, और प्रत्येक केंद्र पर मार्गदर्शन डेस्क स्थापित करने जैसी सिफारिशें भी जीएआरसी द्वारा की गई हैं, ताकि सरकार का सिटिजन फर्स्ट दृष्टिकोण और अधिक प्रभावी बने।
रिपोर्ट में यह भी अनुशंसा की गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विलेज कम्प्यूटर इंटरप्रेन्योर की भूमिका को मजबूत किया जाए और शहरी क्षेत्रों में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से जोन-वाइज सेवा वितरण को और तेज बनाया जाए।
आयोग ने राइट टू सिटिजन पब्लिक सर्विस एक्ट के अंतर्गत नागरिक चार्टर के नियमित ऑडिट और अपडेट के लिए एक संरचित प्रक्रिया की सिफारिश की है। साथ ही, जनसेवा केंद्रों में अतिरिक्त स्टाफ पदों की नियुक्ति, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और सेवा समय की स्पष्टता जैसी सिफारिशें भी शामिल की गई हैं, ताकि नागरिकों को “ईज ऑफ गवर्नेंस” का वास्तविक अनुभव मिल सके।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अढिया ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल तकनीकी सिफारिशों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुशासन की एक नई संस्कृति का प्रतीक है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नागरिक देवो भव’ के विचार को केंद्र में रखते हुए नागरिकों को शासन की धुरी बनाया गया है।
यह पहल गुजरात को डिजिटल गुड गवर्नेंस के एक नए युग में प्रवेश कराने के साथ-साथ, “सरकार नागरिकों के द्वार पर” के मंत्र को साकार करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नागरिक सेवाओं में एक परिवर्तनकारी क्रांति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
Source : IANS
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