Khabarwala 24 News New Delhi: नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (Sushila Karki) देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल उन्हें शपथ दिलाएंगे। जेन-Z समर्थकों के बीच उनके नाम पर सहमति बनी है। काठमांडू के मेयर और प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह ने भी कार्की का समर्थन किया। अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए नेपाल बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग का नाम भी चर्चा में था।
Sushila Karki: भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की प्रतीक
सुशीला कार्की लंबे समय से नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का चेहरा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस के रूप में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई साहसिक फैसले लिए, जिसके कारण वह जेन-Z के बीच बेहद लोकप्रिय हुईं। उनकी ईमानदार और निष्पक्ष छवि ने उन्हें युवाओं का प्रिय बनाया।
नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस
73 वर्षीय सुशीला कार्की (Sushila Karki) नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं। उनका जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर में हुआ था। 11 जुलाई 2016 को वह सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं, लेकिन 30 अप्रैल 2017 को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। वह इस पद पर लगभग एक वर्ष तक रहीं।
शैक्षिक पृष्ठभूमि
सुशीला (Sushila Karki)अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने 1972 में बिराटनगर के महेंद्र मोरांग कैंपस से बीए किया। इसके बाद 1975 में भारत के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। 1978 में उन्होंने त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, नेपाल से कानून की डिग्री प्राप्त की और अगले वर्ष से वकालत शुरू की।
भारत के प्रति सकारात्मक रवैया
एक हालिया इंटरव्यू में सुशीला (Sushila Karki)ने भारत के प्रति अपने सकारात्मक विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मुझे आज भी BHU के शिक्षक और दोस्त याद हैं। गंगा नदी और हॉस्टल की छत पर गर्मी की रातें बिताने की यादें ताजा हैं।” उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों पर जोर देते हुए कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन करती हूं। मेरी उनके बारे में अच्छी राय है। हम भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर बातचीत करेंगे। दोनों देशों के लोगों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, जो प्रेम और सद्भावना पर आधारित हैं।”
सुशीला ने बताया कि वह बिराटनगर की रहने वाली हैं, जो भारत की सीमा से मात्र 25 मील दूर है। वह नियमित रूप से सीमा पर स्थित बाजार जाती हैं। उनके इन बयानों से साफ है कि नेपाल की सत्ता में उनका आना भारत-नेपाल संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत है।
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