Khabarwala 24 News Operation Rising Lion: इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसका नाम है ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion)। ये कोई छोटा-मोटा ऑपरेशन नहीं है, बल्कि एक ऐसा धमाका है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इजरायल और ईरान के बीच तनाव तो हमेशा से ही रहा है, लेकिन अब मामला गंभीर हो गया है। ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों से लेकर सैन्य ठिकानों तक, इजरायल ने सबको निशाना बनाया है।
ऑपरेशन राइजिंग लायन क्या है?
इजरायल ने 13 जून 2025 को तड़के सुबह ईरान के खिलाफ ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) शुरू किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो मैसेज में साफ-साफ कहा, “जब तक इजरायल को अपनी सुरक्षा का भरोसा नहीं हो जाता, ये ऑपरेशन रुकेगा नहीं।” यानी भाई, इजरायल ने ठान लिया है कि वो ईरान के परमाणु प्रोग्राम को जड़ से उखाड़ फेंकेगा। नेतन्याहू ने ये भी कहा कि ये कोई एक-दो दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक लंबा और सख्त ऑपरेशन है।
इस ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) की शुरुआत गुरुवार देर रात हुई, जब इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर प्री-एम्पटिव एयरस्ट्राइक किए। मतलब, पहले ही हमला बोल दिया ताकि ईरान को जवाब देने का मौका न मिले। इन हमलों में ईरान की मिसाइल फैसिलिटी, एयर डिफेंस सिस्टम, और कंट्रोल सेंटर को टारगेट किया गया। इजरायल ने अपने देश में आपातकाल घोषित कर दिया और नागरिकों को अलर्ट रहने को कहा।

इजरायल का मास्टरप्लान: मोसाद का कमाल
इस ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का रोल तो गजब का रहा है। मोसाद ने ईरान के अंदर गुप्त ऑपरेशन चलाकर कई बड़े टारगेट को निशाना बनाया। खबरों के मुताबिक, मोसाद ने तेहरान जैसे संवेदनशील इलाकों में सबोटाज ऑपरेशन चलाए, जिससे ईरान की मिसाइल और हवाई सुरक्षा प्रणाली को कमजोर किया गया। यानी, इजरायल ने पहले से ही प्लानिंग करके ईरान की कमर तोड़ने की ठान ली थी।
परमाणु वैज्ञानिकों पर हमला: ईरान को बड़ा झटका
ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) का सबसे बड़ा निशाना रहा ईरान का परमाणु प्रोग्राम। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कन्फर्म किया कि इस हमले में दो बड़े परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई। इनमें मोहम्मद मेहदी तेहरानची और फेरेयदून अब्बासी का नाम शामिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने कम से कम छह सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें परचिन सैन्य परिसर और कई रिहायशी इलाकों में बने सैन्य कमांडरों के घर शामिल हैं।
मोहम्मद मेहदी तेहरानची, जो तेहरान में इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष थे, और फेरेयदून अब्बासी, जो 2011 से 2013 तक ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन के हेड थे, दोनों ही इस हमले में मारे गए। खास बात ये है कि अब्बासी 2010 में एक हत्या की कोशिश में बच गए थे, लेकिन इस बार वो इजरायल के निशाने से नहीं बच सके।
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नतांज न्यूक्लियर साइट पर धमाका
इस ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) में इजरायल ने ईरान की सबसे महत्वपूर्ण नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी को भी निशाना बनाया। ये वही साइट है, जिसे पहले भी कई बार गुप्त हमलों का सामना करना पड़ा है। ईरान की प्रेस टीवी ने दिखाया कि नतांज से काला धुआं उठ रहा है, जो ये बताता है कि हमला कितना जबरदस्त था। इसके अलावा, तेहरान और आसपास के इलाकों में रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। एक वीडियो में दिखा कि एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में आग लगी थी, और फायर ब्रिगेड की टीमें उसे बुझाने में जुटी थीं।
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ईरान के बड़े सैन्य कमांडर भी ढेर
इस ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) में सिर्फ वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि ईरान के बड़े सैन्य कमांडर भी निशाने पर थे। तस्नीम न्यूज और तेहरान टाइम्स के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ हुसैन सलामी भी इस हमले में मारे गए। इसके अलावा, मोहम्मद बघेरी (ईरान के आर्म्ड फोर्सेस के चीफ ऑफ स्टाफ), गुलाम अली राशिद (खातम अल-अनबिया जॉइंट फोर्सेज के कमांडर), और इस्माइल कानी (कुद्स फोर्स के हेड) जैसे बड़े नाम भी इस हमले में खत्म हो गए। यानी, इजरायल ने न सिर्फ ईरान के परमाणु प्रोग्राम को निशाना बनाया, बल्कि उसके सैन्य नेतृत्व को भी कमजोर कर दिया।
क्यों शुरू हुआ Operation Rising Lion?
इजरायल के एक सैन्य अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इस ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
न्यूक्लियर खतरा: इजरायल का दावा है कि ईरान अब तक के सबसे करीब है परमाणु हथियार बनाने के। एक इजरायली अधिकारी ने CNN को बताया कि ईरान के पास इतना फिसाइल मटेरियल है कि वो कुछ ही दिनों में 15 न्यूक्लियर बम बना सकता है। IAEA (इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) की रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया कि ईरान का परमाणु प्रोग्राम अब सिर्फ सिविल यूज के लिए नहीं, बल्कि एक गुप्त सैन्य प्रोजेक्ट बन चुका है।
बैलिस्टिक मिसाइलें: ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, और वो इन्हें दोगुना-तिगुना करने की फिराक में है। इजरायल का कहना है कि ये मिसाइलें, भले ही परमाणु न हों, लेकिन इजरायल के लिए अस्तित्व का खतरा हैं।
प्रॉक्सी ग्रुप्स: ईरान हिजबुल्लाह, हूती, और दूसरे आतंकी संगठनों को हथियार और टेक्नोलॉजी देता है। ये ग्रुप्स इजरायल के खिलाफ हमले करते हैं, जिससे इजरायल को कई मोर्चों पर जंग लड़नी पड़ती है।
ईरान का जवाब: ड्रोन अटैक और युद्ध की धमकी
इजरायल के ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) के जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया। ईरान ने इजरायल पर 100 से ज्यादा ड्रोन दागे, जिनमें से ज्यादातर को इजरायल ने नाकाम कर दिया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई ने कहा कि इजरायल को इसके लिए कड़ी सजा मिलेगी। ईरान ने इसे युद्ध की घोषणा करार दिया और UN सिक्योरिटी काउंसिल से कार्रवाई की मांग की।
भारत के लिए क्या मतलब?
भारत के लिए ये खबर इसलिए अहम है क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव हमारे लिए भी चिंता का सबब है। भारत ने अपने नागरिकों को इजरायल और ईरान में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही, तेल की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान एक बड़ा तेल उत्पादक देश है। अगर तनाव और बढ़ा, तो पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं, और हमारी जेब पर इसका सीधा असर होगा।
दुनिया की प्रतिक्रिया
दुनियाभर में इस हमले की कड़ी निंदा हो रही है। तालिबान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, तो IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि न्यूक्लियर साइट्स पर हमला नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने साफ किया कि उसका इस ऑपरेशन में कोई रोल नहीं था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो अगला हमला और खतरनाक होगा।
ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (Operation Rising Lion) अभी खत्म नहीं हुआ है। इजरायल ने कहा है कि ये हमले कई दिनों तक चल सकते हैं। दूसरी तरफ, ईरान भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों को इस स्थिति पर नजर रखनी होगी, क्योंकि इसका असर न सिर्फ सिक्योरिटी पर, बल्कि इकॉनमी पर भी पड़ सकता है।


