India-Pakistan Comparison बाल व‍िवाह के ख‍िलाफ पाकिस्तान ने बनाया कानून, भारत दशकों पहले बना चुका कानून, अब ये है स्थ‍ित‍ि

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Khabarwala 24 News New Delhi : India-Pakistan Comparison 21वीं सदी में शादी की उम्र को लेकर पूरी दुनिया ने अपने न‍ियम साफ कर दिए हैं। वहीं, हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आज बाल विवाह जैसी कुरीति के ख‍िलाफ संसद में बिल पार‍ित कर पाया है।

भारत की हमेशा नकल करने वाले पड़ोसी को इस कुरीति को खत्म करने की याद इतनी देर में आई। वहीं भारत उनसे दशकों पहले इसे लेकर सख्त कानून बना चुका है। भारत ने इस सामाजिक बुराई को खत्म करने की दिशा में न सिर्फ पहले कदम उठाया, बल्कि समय के साथ अपने कानूनों को और सख्त भी किया है। आइए जानते हैं कि भारत ने इस कुरीति के खिलाफ 100 साल पहले कैसे कानून बनाने की शुरुआत कर दी थी अब अपने देश में इस कानून की क्या स्थ‍िति है।

पाक ने बनाया बाल व‍िवाह पर कानून (India-Pakistan Comparison)

बता दें कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने 18 साल से कम उम्र में शादी पर रोक लगाने वाले बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। नए कानून के तहत वहां 18 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करने पर 3 साल की सजा और निकाह कराने वाले मौलवी को भी सजा का प्रावधान है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कानून वाकई वहां की जमीनी हकीकत को बदल पाएगा? वहां का समाज किस तरह इस कानून का पालन करेगा, ये तो भव‍िष्य ही बताएगा लेकिन सच्चाई यह है कि भारत पाकिस्तान बंटवारे से पहले ही शादी की उम्र में रोक लगाने वाला कानून भारत ने बना ल‍िया था फ‍िर भी पाकिस्तान ने इस कानून की ओर इतनी गंभीरता नहीं द‍िखाई।

1929 में बाल व‍िवाह के खिलाफ जंग (India-Pakistan Comparison)

भारत में बाल विवाह के खिलाफ कानूनी जंग की शुरुआत 1929 में शारदा एक्ट (चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट) से हुई थी। इस कानून ने उस समय लड़कियों की शादी की उम्र 14 साल और लड़कों की 18 साल तय की। देखा जाए तो उस समय ये एक क्रांतिकारी कदम था। वजह ये थी कि सामाजिक रूढ़ियों और परंपराओं के बीच इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं था। शारदा एक्ट को हरबिलास शारदा ने पेश किया था और यह ब्रिटिश भारत में लागू हुआ था। इसका मकसद था कि कम उम्र की लड़कियों को शादी के बोझ से बचाया जाए क्योंकि कम उम्र में मां बनने से उनकी सेहत और जिंदगी खतरे में पड़ती थी।

1978 में शारदा एक्ट में हुआ संशोधन (India-Pakistan Comparison)

समय के साथ भारत ने इस दिशा में और प्रगति की। साल 1978 में शारदा एक्ट में संशोधन हुआ और लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल कर दी गई। इसके बाद साल 2006 में प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट लागू हुआ। इस ब‍िल ने बाल विवाह को पूरी तरह गैरकानूनी बना दिया। इस कानून के तहत न सिर्फ बाल विवाह कराने वालों को सजा का प्रावधान किया गया बल्कि पीड़ितों को सुरक्षा और राहत देने की व्यवस्था भी की गई। साल 2021 में इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव आया जिसमें लड़कियों की शादी की उम्र को 21 साल करने की बात कही गई, ताकि वे पढ़ाई और करियर पर ज्यादा ध्यान दे सकें।

चाइल्ड मैरिज प्रोहिबिशन ऑफिसर (India-Pakistan Comparison)

आज भारत में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून हैं। हर जिले में चाइल्ड मैरिज प्रोहिबिशन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं, जो शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करते हैं। अगर कोई 18 साल से कम उम्र की लड़की या 21 साल से कम उम्र का लड़का शादी करता है तो यह शादी अवैध मानी जाती है। पीड़ित अपनी शादी को रद्द करा सकते हैं और दोषियों को 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गौरतलब है कि 1929 का चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी लागू था क्योंकि तब दोनों एक ही देश का हिस्सा थे फिर आजादी के बाद पाकिस्तान ने इस दिशा में धीमी प्रगति की।

पाक में ऐसी बाल व‍िवाह की स्थ‍िति (India-Pakistan Comparison)

पाकिस्तान में बाल विवाह की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। खासकर सिंध प्रांत में यह समस्या सबसे ज्यादा है। यूनिसेफ की 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक वहां 18% लड़कियों की 18 साल से पहले शादी कर दी जाती है। साल 1961 में मुस्लिम फैमिली लॉज ऑर्डिनेंस के तहत लड़कियों की शादी की उम्र 16 साल और लड़कों की 18 साल की गई। हाल ही में पाकिस्तानी सीनेट ने एक बिल पास किया, जिसमें लड़कियों की शादी की उम्र को 18 साल कर दिया गया। पाकिस्तान में अब बाल विवाह कराने वालों को 3 साल की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अब उनके सामने रूढ़‍ी और परंपराएं किसी चुनौती से कम नहीं हैं।

बाल व‍िवाह को लेकर चुनौतियां बाकी (India-Pakistan Comparison)

भारत ने बाल विवाह के खिलाफ कानूनी लड़ाई में काफी प्रगति की है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2019-21) के मुताबिक, 20-24 साल की उम्र की 23% महिलाएं 18 साल से पहले शादी कर ली गई थीं, जो 2005-06 में 47% थी यानी पिछले 15 सालों में इसमें काफी कमी आई है। सरकार ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2029 तक बाल विवाह की दर को 5% से नीचे लाना है। भारत के ग्रामीण इलाकों में, खासकर बिहार, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आज भी बाल विवाह रोकने की चुनौती है। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक दबाव इसके मुख्य कारण हैं।

फ‍िर भी सुलझी हुई है भारत की सोच (India-Pakistan Comparison)

भारत ने न सिर्फ पहले कानून बनाया बल्कि उसे लागू करने के लिए सख्त कदम भी उठाए। हर जिले में चाइल्ड मैरिज प्रोहिबिशन ऑफिसर, जागरूकता अभियान और सख्त सजा के प्रावधान भारत को इस मामले में पाकिस्तान से आगे रखे है। भारत में लड़कियों की शिक्षा और रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। जिससे वो शादी के बजाय अपने करियर पर ध्यान दे सकें। वहीं, पाकिस्तान में अभी कानून बनने की शुरुआत हुई है और उसे लागू करने में सामाजिक और धार्मिक बाधाओं की चुनौतियां हैं। इस बिल को लागू करने में कई बाधाएं हैं। मसलन, 27 मई, 2025 को इस्लामिक आइडियोलॉजिकल काउंसिल ने इस बिल को खारिज कर दिया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद 30 मई को इसे मंजूरी मिली।

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