तेहरान, 8 मार्च (khabarwala24)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को एक सप्ताह से ज्यादा हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उसके हमलों के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया के अपने उन पड़ोसियों से माफी मांग ली है, जहां ईरान ने हवाई हमले किए, लेकिन मीडिया रिपोर्ट तो कुछ और ही हालात बयां कर रही हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने ऊपर हमला करने वालों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और ताकत से जवाब देगा। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति ने यह बार अस्पताल में भर्ती अपने नागरिकों से मिलने के बाद यह बयान दिया।
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि उनके दबाव में ईरान ने अपने पड़ोसियों से माफी मांगी है और उनसे हर गया है। इस पर पेजेश्कियन ने कहा कि उनके बयानों को दुश्मन ने गलत समझा, जो पड़ोसियों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहा है। उसने इसे खाड़ी देशों पर हमले निलंबित करने के फैसले के रूप में देखा, जबकि हमले बंद नहीं हुए हैं।
उन्होंने दोहराया कि ईरान अपने मित्र पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। ईरान को अन्य देशों से होने वाले हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन इस जवाबी कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि उन देशों के साथ कोई विवाद है।
ईरान अपने ऊपर हमला करने वालों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और पूरी ताकत से जवाब देगा। तमाम समस्याओं के बावजूद हम किसी भी राजनीतिक दल या गुट की परवाह किए बिना अपनी पूरी ताकत से दुश्मन के खिलाफ एकजुट होकर खड़े रहेंगे। हम उन्हें अपनी जमीन का एक इंच भी कब्जा नहीं करने देंगे।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान रुकने वाला नहीं है और जिस भी स्थान से उस पर हमले किए जाएंगे, वह उन पर जवाबी हमला करेगा। सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिकियों और इजरायलियों द्वारा घोषित लक्ष्य वास्तविक नहीं हैं। उनका असली उद्देश्य ईरान को एक राष्ट्र के रूप में तोड़ना और इसीलिए ईरान आत्मरक्षा के अपने अधिकार पर कोई समझौता नहीं करेगा।
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया परिषद द्वारा किए गए एक खुफिया रिपोर्ट में पाया गया कि ईरान पर अमेरिका के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हमला भी ईरान की सरकार को गिराने में सफल नहीं होगा। सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन निष्कर्षों से ट्रंप प्रशासन के इस दावे पर संदेह पैदा होता है कि युद्ध चार से छह सप्ताह के भीतर समाप्त हो सकता है।
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