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‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ मंच पर डिप्लोमैट्स ने बताई चुनौतियों से निपटने की दास्तान

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नई दिल्ली, 26 फरवरी (khabarwala24)। भारत में विभिन्न देशों की 30 से ज्यादा महिलाएं एंबेसडर पद पर हैं। ये महिलाएं नारी शक्ति का प्रतीक हैं। इनमें से कुछ ने गुरुवार को अपने सामने आने वाले चैलेंज और उनसे निपटने के जज्बे की कहानी सुनाई।

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की ओर से नई दिल्ली में ‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ऐसा आयोजन जिसमें देश विदेश से आई महिलाओं ने अपने अनुभव और इस विषय की प्रासंगिकता को लेकर विचार व्यक्त किए।

इस आयोजन के अंतर्गत ‘डिप्लोमेसी थ्रू हर आइज, विमेन लीडिंग ग्लोबल’ विषय पर दुनिया के अलग-अलग देशों से आई डिप्लोमैट्स ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

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लिथुआनिया की एंबेसडर मिकेविसीन ने कहा कि हालात पूरी दुनिया में अब बदले हैं। मैं 32 साल से अपने देश की फॉरेन सर्विस में हूं, तब हालात कुछ और थे और अब कुछ और। तब हमें महसूस होता था कि हम किसी से कमतर हैं। विदेश सेवा में भी पहले महिलाएं नहीं थीं, अब आने लगी हैं। हमारे देश में 60 फीसदी महिलाएं डिप्लोमैट हैं, लेकिन आप देखिए कितनों को राजदूत की जिम्मेदारी मिली है। 50 फीसदी से भी कम हैं।

भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिनी कोलोन ने भारत से अपने देश की तुलना के सवाल का जवाब संजीदगी से दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 29.9 मिलियन लोग हैं; भारत के मुकाबले हमारा देश छोटा है। वैसे दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री सिरीमावो भंडारनायके श्रीलंका से ही थीं, लेकिन ये भी सच है कि अब तक वही एकमात्र विदेश मंत्री रहीं। मुझे उम्मीद है कि आगे कभी ऐसा होगा। काफी महिलाएं हैं विदेश सेवा में, लेकिन हमारे यहां कोई रिजर्वेशन नहीं है। महिलाएं संसद और सर्विस में भी हैं, लेकिन मिशन पोस्ट की बारी आती है तो महिलाओं को कम नियुक्त किया जाता है। लोगों को विश्वास है, लेकिन प्रशासनिक फैसले में उन्हें प्राथमिकता दिए जाने की कमी साफ दिखती है।

भारत में केन्या मिशन की उप प्रमुख मैरी एम. मुतुक ने बताया कि हमारे यहां ये कल्चर है कि पुरुष ही लीड करते हैं; सीईओ पुरुष होते हैं। बहुत कम समय से महिलाओं को जिम्मेदारी मिलने लगी है। एक अजीब हकीकत है कि पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी आपको कभी-कभी आपकी ताकत को तरजीह नहीं देतीं और हेय दृष्टि से देखती हैं। मुझे लगता है ज्यादातर महिलाएं ऐसा फेस करती हैं। बतौर महिलाएं हमें पुरुषों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। उन्हें ज्यादा लड़ाई लड़नी पड़ती है।

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भारत में एस्टोनिया की राजदूत मार्जे लुप ने कहा कि हम आईटी में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और अच्छा लगता है जब हमसे भारत में कोई बात करता है तो जेंडर को लेकर नहीं बल्कि डिजिटल तकनीक को लेकर राय रखता और पूछता है। लेकिन ये भी सच है कि हमारे देश में फिलहाल आईटी में काम करने वाली महिलाएं कम हैं। हम ज्यादा से ज्यादा युवतियों को इस सेक्टर में लाना चाहते हैं।

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