नई दिल्ली, 15 मार्च (khabarwala24)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि यूएस होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अन्य देशों से भी ऐसा करने की अपील की। ऐसे में चीन और ब्रिटेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति की इस अपील पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
चीन और ब्रिटेन, दोनों ही देशों में से किसी ने भी पुष्टि नहीं की कि वे स्ट्रेट में वॉरशिप भेज रहे हैं या नहीं। वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिकी मीडिया को यह नहीं बताया कि देश इस इलाके में नेवल एसेट्स तैनात करने का प्लान बना रहा है या नहीं।
चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने सीएनएन को बताया कि चीन दुश्मनी को तुरंत रोकने की मांग करता है, और सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे स्थिर और बिना रुकावट एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित करें।
बयान के आखिर में कहा गया, “मिडिल ईस्ट के देशों के एक सच्चे दोस्त और रणनीतिक साझेदार के तौर पर, चीन लड़ाई में शामिल पार्टियों समेत संबंधित पार्टियों के साथ बातचीत को मजबूत करता रहेगा और तनाव कम करने और शांति बहाल करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा।”
इसी तरह, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि यूके अभी अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ इस इलाके में शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्पों पर बात कर रहा है।
बीते दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “कई देश, खासकर वे जो ईरान की होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हैं, स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर वॉरशिप भेजेंगे। हमने पहले ही ईरान की 100 प्रतिशत सैन्य क्षमता को खत्म कर दिया है, लेकिन उनके लिए इस वॉटरवे पर या इसमें कहीं भी एक-दो ड्रोन भेजना, माइन गिराना, या क्लोज रेंज मिसाइल गिराना आसान है, चाहे वे कितने भी बुरी तरह हार गए हों।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, साउथ कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे देश, जो इस बनावटी रुकावट से प्रभावित हैं, इस इलाके में शिप भेजेंगे ताकि होर्मुज स्ट्रेट को अब एक ऐसे देश से खतरा न रहे जिसका सिर पूरी तरह से खत्म हो चुका है। किसी न किसी तरह, हम जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट को खुला, सुरक्षित और फ्री कर देंगे।”
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बड़ा दावा किया है। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान की योजना पूरे मध्य पूर्व पर कब्जा करने और इजरायल को पूरी तरह से नष्ट करने की थी। ईरान की ही तरह उसकी वो योजनाएं भी अब खत्म हो चुकी हैं।
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