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ईरान में चल रहे संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए

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वॉशिंगटन, 3 मार्च (khabarwala24)। यूएस सेंट्रल कमांड ने जारी बयान में बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना के बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं।

यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि 2 मार्च को ईरान से चल रहे संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है। अमेरिकी फोर्स ने हाल ही में दो ऐसे सैनिकों के अवशेष बरामद किए हैं जिनका पहले पता नहीं था।

कमांड ने बताया कि बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन जारी हैं। शहीद सैनिकों की पहचान उनके रिश्तेदारों को बताने के 24 घंटे बाद तक गोपनीय रखी जा रही है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिकी मिलिट्री फायरपावर का सबसे बड़ा रीजनल कंसंट्रेशन शामिल है।

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यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी फैक्ट शीट में कहा गया है कि ऑपरेशन अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर 28 फरवरी को सुबह 1:15 बजे शुरू हुआ। यह कमांड एरिया ऑफ़ रिस्पॉन्सिबिलिटी में किया जा रहा है और टारगेट ईरान में हैं।

डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि अमेरिकी फोर्स ईरान के सिक्योरिटी सिस्टम को खत्म करने के लिए टारगेट पर हमला कर रही है और उन जगहों को प्राथमिकता में रखा है जो तुरंत खतरा पैदा करती हैं। पहले 48 घंटों में 1250 से ज़्यादा टारगेट पर हमला किया गया है।

तैनात किए गए युद्ध हथियारों में बी-1 और बी-2 बॉम्बर, एफ-15, एफ-16, एफ-18, एफ-22 और एफ-35 फाइटर जेट, ए-10 अटैक एयरक्राफ्ट, पैट्रियट और थाड मिसाइल सिस्टम, न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एमक्यू-9 रीपर शामिल हैं।

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टारगेट में “कमांड एंड कंट्रोल सेंटर,” “आईआरजीसी जॉइंट हेडक्वार्टर,” “आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्सेज हेडक्वार्टर,” “इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम,” “बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स,” “ईरानी नेवी शिप्स,” और “ईरानी नेवी सबमरीन” शामिल हैं।

कमांड ने बताया कि एफ/ए-18 के कई स्क्वाड्रन ईरान के खिलाफ लगातार ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं। अमेरिकी एयरफोर्स के विमान ज़बरदस्त फायर पावर देने के लिए दिन-रात उड़ान भर रहे हैं।

ईरान की अब ओमान की खाड़ी में कोई नेवल प्रेजेंस नहीं है। दो दिन पहले ओमान की खाड़ी में ईरान के 11 जहाज़ थे लेकिन आज उनके पास कोई जहाज नहीं है।

ईरान ने दशकों से ओमान की खाड़ी में इंटरनेशनल शिपिंग को परेशान किया है और उन पर हमला किया है। वे दिन अब खत्म हो गए हैं। समुद्री नेविगेशन की आज़ादी ने 80 साल बाद अमेरिकी और ग्लोबल अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। अमेरिकी सेना इसकी रक्षा करती रहेगी।

ओमान की खाड़ी अरब सागर को होर्मुज जलडमरू मध्य से जोड़ती है। दुनियाभर में तेल शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके से होकर गुज़रता है। कोई भी रुकावट ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर डालती है, जिसमें भारत जैसे बड़े आयातक भी शामिल हैं।

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