वॉशिंगटन, 17 मार्च (khabarwala24)। अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ लॉमेकर्स ने चीन को उन्नत एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेचने के फैसले पर नई चिंता जताई है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इस बिक्री को मंजूरी देने से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
हाउस कमेटी ऑन फॉरेन अफेयर्स के रैंकिंग सदस्य, कांग्रेसी ग्रेगरी डब्ल्यू. मीक्स और सीनेट बैंकिंग कमेटी की रैंकिंग सदस्य, सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि इस सौदे से जुड़ी पहली मंजूरी का विवरण मिलने के बाद उनकी चिंता पहले से भी ज्यादा बढ़ गई है।
दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा, “दिसंबर में, हमने वाणिज्य विभाग से क़ानून का पालन करने और हमें ट्रंप प्रशासन द्वारा चीन को किसी भी एडवांस्ड एआई चिप्स की बिक्री की मंज़ूरी के बारे में जानकारी देने को कहा था।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें आखिरकार प्रशासन के पहले लाइसेंस की मंजूरी के बारे में जानकारी मिल गई है, और अब हम पहले से कहीं ज्यादा चिंतित हैं कि ट्रंप प्रशासन इस बिक्री को मंजूरी देकर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर कर रहा है।”
मीक्स और वॉरेन ने कांग्रेस से इस मामले में कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए कांग्रेस को दोनों दलों की सहमति से ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे चीन को अमेरिका की उन्नत तकनीक हासिल करने से रोका जा सके।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने चीन को उन्नत एआई चिप के निर्यात को मंजूरी दी। इस फैसले की जानकारी 25 फरवरी को एनवीडिया कंपनी ने सार्वजनिक की थी। ऐसे चिप अत्याधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनका इस्तेमाल सैन्य क्षेत्र में भी किया जा सकता है।
मीक्स और वॉरेन ने बताया कि दिसंबर में उन्होंने 2018 के एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्ट के तहत वाणिज्य विभाग से इस फैसले से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस कानून के अनुसार, जब कांग्रेस की किसी समिति के वरिष्ठ सदस्य जानकारी मांगते हैं तो विभाग को लाइसेंस आवेदन समेत संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराना होता है।
दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि जिस तकनीक की बात हो रही है, उसका सैन्य उपयोग भी संभव है। इसलिए इस तरह की तकनीक के निर्यात से जुड़े फैसले बेहद संवेदनशील होते हैं। दरअसल, उन्नत एआई चिप अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तकनीकी मुकाबले का एक अहम मुद्दा बन गए हैं। दोनों देश ऐसी नई तकनीकों में आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जो भविष्य में आर्थिक और सैन्य ताकत तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
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