वॉशिंगटन, 21 फरवरी (khabarwala24)। एक वरिष्ठ डेमोक्रेटिक लॉमेकर ने अपनी स्टेट ऑफ द यूनियन गेस्ट सीट खाली रखकर 73 वर्ष की भारतीय हरजीत कौर को सम्मान दिया। हरजीत कौर को अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में लेकर भारत भेज दिया था।
कांग्रेस सदस्य जॉन गैरामेंडी ने कहा कि उन्होंने यह सीट अपनी पूर्व मतदाता हरजीत कौर के नाम की है, जिन्हें पिछले साल भारत डिपोर्ट कर दिया गया था।
उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैं अपनी स्टेट ऑफ द यूनियन की गेस्ट सीट 73 वर्षीय दादी हरजीत कौर को समर्पित करता हूं। दुर्भाग्य से वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं, क्योंकि उन्हें आधी रात को बेरहमी से भारत डिपोर्ट कर दिया गया था। यह सीट उनके लिए है और उन सभी लोगों के लिए है, जिन्हें ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति के तहत हिरासत में लिया गया, बंद रखा गया या जिनकी मौत हुई। उनकी खाली सीट इस नीति की मानवीय कीमत का प्रतीक बने।”
हरजीत कौर 1990 के शुरुआती वर्षों से अमेरिका में रह रही थीं। उनका असाइलम केस 2012 में खारिज हो गया था। इसके बाद भी वे 13 साल से अधिक समय तक हर छह महीने में सैन फ्रांसिस्को में इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने हाजिरी लगाती रहीं।
8 सितंबर 2025 को नियमित जांच के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया और कैलिफोर्निया के बेकर्सफील्ड स्थित एक इमिग्रेशन केंद्र में रखा गया। अगले दिन उन्हें मेसा वर्डे डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।
19 सितंबर को, सुबह करीब 2:00 बजे, उन्हें बेकर्सफील्ड से लॉस एंजिल्स हथकड़ी पहनाकर ले जाया गया और उनके वकील या परिवार को बिना बताए जॉर्जिया भेज दिया गया। इसके तुरंत बाद, उन्हें भारत के लिए एक चार्टर फ्लाइट में बिठा दिया गया। 24 घंटे से ज़्यादा समय तक उनका कोई अता-पता नहीं चला। हालांकि उनके परिवार ने कमर्शियल ट्रैवल का इंतज़ाम किया था और उनके साथ भारत जाने का प्लान बनाया था, लेकिन उन्हें अलविदा कहने का मौका दिए बिना ही डिपोर्ट कर दिया गया।
गैरामेंडी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वे खतरनाक अपराधियों पर कार्रवाई करेंगे। लेकिन 73 साल की ऐसी दादी, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जो 13 साल से नियमित रूप से हाजिरी लगा रही थीं, उन्हें इस तरह भेजना दिखाता है कि हजारों परिवार इस नीति से प्रभावित हुए हैं।”
कांग्रेसी के कार्यालय ने बताया कि हिरासत के दौरान कौर को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्हें कई घंटों तक बिना बिस्तर और कुर्सी के रखा गया, फर्श पर सोना पड़ा, एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाते समय जंजीरों में रखा गया, उनके धार्मिक विश्वास के अनुसार शाकाहारी भोजन नहीं दिया गया, नहाने की अनुमति सीमित कर दी गई, जरूरी दवाएं समय पर नहीं दी गईं और पर्याप्त पानी भी नहीं मिला। एक बार तो उन्हें पूरे दिन भोजन न मिलने के बाद केवल बर्फ का कटोरा दिया गया।
उनके वकील के अनुसार, उन्हें डॉक्टर या नर्स से मिलने का मौका नहीं मिला, जबकि उन्होंने कई बार अनुरोध किया। उन्हें घुटनों का ऑपरेशन हो चुका था और वे थायरॉयड बीमारी तथा पुरानी माइग्रेन से भी पीड़ित थीं। भारत लौटने के बाद वे परिवार के संपर्क में हैं, लेकिन स्वास्थ्य समस्याएं अब भी बनी हुई हैं और पास में परिवार का कोई सदस्य उनकी मदद के लिए नहीं है।
अमेरिका में इमिग्रेशन नीति हाल के वर्षों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में। भारत उन देशों में शामिल है, जिनके नागरिकों को अमेरिका में इमिग्रेशन कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


