वाशिंगटन, 29 जनवरी (khabarwala24)। ‘सीनेट की विदेश संबंध समिति’ के सामने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि निकोलस मादुरो के शासन में वेनेजुएला पश्चिमी गोलार्ध में चीन, रूस और ईरान के लिए एक रणनीतिक ठिकाना बन गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन वेनेजुएला का तेल भारी छूट पर हासिल कर रहा था और इसके जरिए अमेरिका के बेहद करीब अपना प्रभाव बढ़ा रहा था।
रुबियो ने कहा, “हमारे ही गोलार्ध में एक ऐसा शासन था, जिसे एक अभियुक्त मादक पदार्थ तस्कर चला रहा था और जो दुनिया के लगभग हर प्रतिद्वंद्वी, विरोधी और दुश्मन के लिए एक ऑपरेशन बेस बन गया था।”
उन्होंने बताया कि चीन को वेनेजुएला का तेल करीब 20 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर मिल रहा था। कई मामलों में चीन इसके लिए पैसे भी नहीं देता था, बल्कि इसे अपने पुराने कर्ज की भरपाई के तौर पर इस्तेमाल करता था।
रुबियो ने कहा, “यह वेनेजुएला के लोगों का तेल है, और इसे चीन को ‘बार्टर’ यानी लेन-देन के बदले दिया जा रहा था। उस समय वेनेजुएला से चीन, रूस और ईरान तीनों ही अपने-अपने हितों के लिए काम कर रहे थे।”
उन्होंने इस स्थिति को अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक खतरा बताया। रुबियो ने कहा कि यह खतरा किसी दूसरे महाद्वीप में नहीं, बल्कि उसी गोलार्ध में पैदा हो रहा था, जहां अमेरिका स्थित है। इसी वजह से वाशिंगटन ने मादुरो सरकार के खिलाफ कदम उठाए ताकि इस स्थिति को बदला जा सके और अमेरिका अपनी रणनीतिक पकड़ दोबारा मजबूत कर सके।
रुबियो ने अमेरिकी नेतृत्व में लगाए गए तेल ‘क्वारंटीन’ का भी जिक्र किया। उन्होंने साफ किया कि यह कोई ‘नाकाबंदी’ नहीं है, लेकिन इसके चलते चीन को मिलने वाला सस्ता वेनेजुएला तेल काफी हद तक कम हो गया है। चीन अब वेनेजुएला का तेल खरीद सकता है, लेकिन उसे वही कीमत चुकानी होगी जो दुनिया के बाकी देश चुकाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिबंधित वेनेजुएला तेल से मिलने वाली कमाई अब अमेरिकी निगरानी में रखे गए खातों में जमा की जा रही है। इस पैसे का इस्तेमाल वेनेजुएला के लोगों के हित में किया जाएगा।
रुबियो ने कहा कि चीन की रणनीति विचारधारा से ज्यादा आर्थिक दबाव पर आधारित है। वह दूरसंचार, अहम बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों में दिलचस्पी रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अक्सर “खराब समझौतों” और कर्ज के जरिए देशों पर अपनी पकड़ बनाती हैं।
हालांकि, रुबियो ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में चीन का प्रभाव अब कुछ कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पनामा ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से बाहर निकलने का फैसला किया है और लैटिन अमेरिका में राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वेनेजुएला दोबारा कभी भी ईरान, रूस और चीन का खेल का मैदान न बने, खासकर अमेरिका के अपने ही गोलार्ध में।
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