इस्लामाबाद, 11 मार्च (khabarwala24)। पाकिस्तान में दहेज को बैन करने वाले एक बिल को ‘अव्यावहारिक’ बताते हुए खारिज कर दिया गया। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की इंटरियर स्टैंडिंग कमेटी ने इस बिल को खारिज किया, जबकि पाकिस्तान में हर साल दहेज के विवादों के कारण लगभग दो हजार दुल्हनों की हत्या होती है।
इस बिल का खारिज होना न केवल संसदीय असफलता है, बल्कि यह राज्य की उस असहज स्थिति को भी दिखाता है, जिसमें वह परंपरा के नाम पर महिलाओं पर होने वाले भेदभाव और हिंसा को चुनौती देने से बचता है।
पाकिस्तान में दहेज को उपहार या सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, जिसमें दुल्हन का परिवार नकद, जेवरात, घरेलू सामान और अन्य मूल्यवान वस्तुएं वर के परिवार को देता है। यह वही प्रथा है जिसके कारण दबाव, अपमान और हिंसा होती है।
जिन परिवारों के पास पर्याप्त दहेज देने की क्षमता नहीं होती, उन्हें समाज से बहिष्कार का सामना करना पड़ता है और बेटियों को बोझ समझा जाता है। पिछले साल पंजाब असेंबली के एक स्पीकर ने कहा कि पाकिस्तान में लगभग 1.35 करोड़ महिलाएं अभी भी अविवाहित हैं, क्योंकि उनके परिवार दहेज नहीं दे सके।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता शर्मिला फारूकी ने दहेज बैन करने का बिल पेश किया। इस प्रस्तावित कानून के अनुसार, कोई भी जो दहेज देगा, लेगा या प्रथा अपनाएगा, उसे पांच साल तक की जेल और 2,50,000 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) या दहेज की बराबर कीमत का जुर्माना हो सकता था।
साथ ही, बिल में यह भी प्रावधान था कि जो कोई भी दहेज मांगता है, उसे दो साल तक जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है। बिल का उद्देश्य दहेज को सामान्य मानने वाली संस्कृति को रोकना और इसके प्रचार या विज्ञापन को अपराध बनाना था। इसके अलावा, बिल ने सभी शादी के उपहारों को दुल्हन की व्यक्तिगत संपत्ति माना और कहा कि जो भी उपहार उसके अलावा किसी और के पास हैं, उन्हें तीन महीने के अंदर उसे सौंपना होगा।
बिल के उद्देश्यों के बावजूद कमेटी ने इसे सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। अध्यक्ष राजा खुर्रम नवाज ने कहा कि पाकिस्तान में पहले से ही शादी के खर्च और दहेज प्रथाओं को नियंत्रित करने वाले कानून हैं और उन्हें सख्ती से लागू करना अधिक प्रभावी होगा। अन्य कमेटी सदस्यों जैसे ख्वाजा इजरुल हसन ने इस बिल की आलोचना की कि शिकायत करने की जिम्मेदारी दुल्हन और उसके परिवार पर डाली गई है, जिससे पारिवारिक रिश्ते खराब हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, “इस नामंजूरी से पाकिस्तान की कानून बनाने की प्रक्रिया की गहरी समस्या सामने आती है। संरचनात्मक असमानता को चुनौती देने वाले कानूनों को अक्सर अत्यधिक उच्च मानकों पर तौला जाता है, जबकि जो स्थिति को बनाए रखते हैं, उन्हें कम जांच-पड़ताल के साथ मंजूरी मिल जाती है।
डॉ. रखशिंदा परवीन ने कहा कि इसे ‘अव्यवहारिक’ बताकर खारिज करना रोजमर्रा के लैंगिक दबाव के खिलाफ कानून बनाने से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कमेटी की चर्चा, चिंताजनक रूप से, दहेज को बढ़ावा देती प्रतीत हुई।”
उन्होंने कहा, “यह परिणाम विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह संकट बहुत बड़ा है। दहेज विवाद न केवल हिंसा को बढ़ाते हैं, बल्कि गरीबी को भी गहरा करते हैं, क्योंकि गरीब परिवार दहेज पूरा करने के लिए कर्ज लेते हैं और और अधिक वित्तीय संकट में फंस जाते हैं। बिल का खारिज होना संकेत देता है कि राज्य इस दबावपूर्ण व्यवस्था का सीधे सामना करने के बजाय इसे केवल नियंत्रित करने में ही रुचि रखता है।”
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