यरूशलम, 8 मार्च (khabarwala24)। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक लाइव प्रसारण में कहा कि इजराइल का ईरान पर हमला पूरी ताकत और बिना किसी समझौते के जारी रहेगा।
नेतन्याहू ने शनिवार को कहा कि इजरायल के पास “ईरानी शासन” को कमजोर करने और “बदलाव लाने” के लिए कई सरप्राइज के साथ एक अच्छी तरह से तैयार प्लान है। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य ईरान की मौजूदा सत्ता को कमजोर करना और वहां बदलाव की स्थिति बनाना है।
ईरान की जनता को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा, “सच्चाई का समय करीब आ रहा है। हमारा मकसद ईरान को तोड़ना नहीं है, बल्कि उसे आजाद कराना है और उसके साथ शांति से रहना है।”
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की भी आलोचना की। उनका कहना था कि गाजा में ईरान से जुड़े समूहों के खिलाफ चल रही इस लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र बिना वजह इजराइल की निंदा कर रहा है, जबकि ईरान में हो रही हिंसा पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
इसके साथ ही नेतन्याहू ने लेबनान की सरकार से कहा कि वह युद्धविराम समझौते को सख्ती से लागू करे और हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो हिजबुल्लाह की आक्रामक कार्रवाई लेबनान के लिए बहुत गंभीर परिणाम ला सकती है।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि एक हफ्ते की लड़ाई के बाद अमेरिका ने ईरान की सेना को काफी कमजोर कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के पास बातचीत में मजबूत स्थिति है, लेकिन फिलहाल वह तेहरान के साथ किसी समझौते की कोशिश नहीं कर रहा है।
शनिवार को एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस संघर्ष की शुरुआती कार्रवाई ईरान की सेना के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था।
ट्रंप के अनुसार, “हमने उनकी नौसेना को लगभग खत्म कर दिया है। उनके 44 जहाज नष्ट कर दिए गए हैं। उनकी वायुसेना भी खत्म कर दी गई है। लगभग हर विमान को नष्ट कर दिया गया है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने बताया, “हमने उनके लगभग 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रणालियों को हासिल करना बहुत मुश्किल और बहुत महंगा होता है।
ट्रंप के मुताबिक, लॉन्चर और हथियार बनाने की क्षमता में कमी आने से ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की ताकत काफी घट गई है। उन्होंने कहा कि अब ईरान उतने हमले नहीं कर पा रहा जितने उसने संघर्ष के पहले दो दिनों में किए थे। अब उसकी क्षमता लगभग 9 प्रतिशत तक रह गई है।
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