काठमांडू, 21 फरवरी (khabarwala24)। नेपाल के दक्षिण-पूर्वी सीमावर्ती जिले रौतहट में स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को मुख्यालय गौर के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया। इसकी वजह दो गुटों की झड़प बताई जा रही है। प्रशासन ने हिंसा की आशंका के चलते ये कदम उठाया है।
रौतहट के डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस (डीएओ) ने एक नोटिस में कहा कि कर्फ्यू ऑर्डर में शनिवार दोपहर 1 बजे से अगली सूचना तक पूरब में मुदबलवा गेट, पश्चिम में लालबकैया डैम, उत्तर में बाम कैनाल और गौर के दक्षिण में गौर कस्टम ऑफिस तक फैले इलाकों में लोगों की आवाजाही और सभी तरह के जमावड़े, सभाएं, जुलूस और प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है।
भारत की सीमा से लगा रौतहट नेपाल के सबसे गरीब जिलों में से एक है और इसका राजनीतिक और धार्मिक हिंसा का इतिहास रहा है।
रौतहट के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर दिनेश सागर भुसाल ने khabarwala24 को बताया, “ताजा झड़प गुरुवार शाम को तब हुई जब एक बारात में जा रहे लोगों की धर्म विशेष के लोगों से भिड़ंत हो गई।” उन्होंने कहा, “शादी के जुलूस में बज रहे तेज म्यूजिक से लोगों को ऐतराज था। संगीत रोकने को लेकर ही दोनों गुटों की बहसबाजी झड़प में बदल गई, और दोनों ओर से एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए गए।”
भुसाल ने कहा कि शुक्रवार शाम को शांति समझौते के बावजूद, शनिवार सुबह एक गाड़ी में आग लगाने के बाद तनाव फिर से बढ़ गया, जिससे हालात और बिगड़ गए और स्थानीय प्रशासन को ऐहतियातन कर्फ्यू लगाना पड़ा।
डीएओ ने कहा कि शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस फोर्स की भारी तादाद में तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और लोगों से संयम बरतने की अपील की गई है।
भुसाल ने कहा, “जब से कर्फ्यू लगाया गया है, हालात काबू में आ गए हैं।”
नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव होने वाले हैं, इसलिए प्रशासन को इस बात की भी फिक्र है कि राजनीतिक मकसद के लिए हालात का फायदा उठाने की कोशिश की जा सकती है। भुसाल ने कहा, “हम ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।”
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