बेरुत, 15 मार्च (khabarwala24)। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इजरायली सेना के इस दावे को खारिज कर दिया है कि एम्बुलेंस का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए किया गया था। साथ ही इन आरोपों को “मानवता के खिलाफ अपराध” को उचित ठहराने का प्रयास बताया है।
मंत्रालय ने कहा कि लेबनान पर हमले की शुरुआत के बाद से इजरायली सेना ने बचाव अभियानों के दौरान एम्बुलेंस टीमों को बार-बार निशाना बनाया है, जिसमें शनिवार की सुबह दक्षिणी गांव बुर्ज कलाउइयेह में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हमला भी शामिल है।
बयान के अनुसार, इस हमले में डॉक्टरों, नर्सों और बचाव कर्मियों सहित 12 चिकित्साकर्मी मारे गए, जबकि एक स्वास्थ्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया और चार अन्य लापता हैं।
मंत्रालय ने आगे कहा कि 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 26 पैरामेडिक्स मारे गए हैं और 51 अन्य घायल हुए हैं। मंत्रालय ने इस संख्या को चिकित्सा टीमों पर लगातार हो रहे हमलों का सबूत बताया है, जो अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार लेबनानी रेड क्रॉस तक भी पहुंच गए हैं।
इजरायल का यह दावा कि एम्बुलेंस का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए किया जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और चिकित्सा कर्मियों और सुविधाओं की सुरक्षा करने वाले जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन को सही ठहराने का प्रयास है।
शनिवार को इससे पहले, इजरायली सेना के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हिजबुल्लाह बड़े पैमाने पर एम्बुलेंस का इस्तेमाल “सैन्य उद्देश्यों” के लिए कर रहा है, इसके साथ ही चेतावनी दी कि चिकित्सा सुविधाओं और एम्बुलेंस का सैन्य उपयोग तुरंत बंद होना चाहिए।
27 नवंबर, 2024 को युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार हिजबुल्लाह ने 2 मार्च को लेबनान से इजरायल की ओर रॉकेट दागने की घोषणा की। इसके बाद इजरायल ने समूह के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियान शुरू किया और दक्षिणी और पूर्वी लेबनान के कई क्षेत्रों के साथ-साथ बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर गहन हवाई हमले किए।
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