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ईरान के ट्रांजिशन प्लान में भारत के साथ संबंधों और चाबहार पोर्ट के फिर से शुरू होने पर जोर

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वॉशिंगटन, 8 मार्च (khabarwala24)। ईरान के विपक्षी नेताओं ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिसमें भारत के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बड़े ऊर्जा बाजारों में से एक है। ऐसे में ईरान के विपक्षी नेताओं की ओर से जारी ब्लू प्रिंट में भारत को लंबे समय तक कच्चे तेल के निर्यात को फिर से बहाल करने की भी बात कही गई है।

यह प्रस्ताव ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट की इमरजेंसी फेज बुकलेट में है। एक ट्रांजिशनल सरकार ईरान की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को किसी सरकार के गिरने के बाद पहले छह महीनों में कैसे स्थिर कर सकती है, इसे लेकर भी इस प्रस्ताव में बात की गई है।

178 पेज के इस प्रस्ताव में ईरान की भविष्य की विदेश नीति में भारत को एक जरूरी आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के तौर पर बताया गया है। इस प्रस्ताव का मकसद सालों के बैन और आइसोलेशन के बाद व्यापार लिंक को फिर से स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने की कोशिश है।

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इस प्लान के तहत, ईरान देश के दक्षिण-पूर्वी तट पर चाबहार पोर्ट के विकास पर नई दिल्ली के साथ सहयोग फिर से शुरू करेगा। इसके साथ ही इसे फारस की खाड़ी और हिंद महासागर को मध्य एशिया से जोड़ने वाले एक कमर्शियल हब के तौर पर तैयार करने की प्लानिंग है।

भारत के लिए, इस पोर्ट को लंबे समय से पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और बड़े सेंट्रल एशियाई इलाके के लिए एक रणनीतिक गेटवे के तौर पर देखा जाता रहा है।

ब्लूप्रिंट में भारत को क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट को फिर से शुरू करने की भी बात कही गई है। बता दें, भारत कभी ईरान के सबसे बड़े एनर्जी आयातकों में से एक था। हालांकि, अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए भारी प्रतिबंधों के बाद ट्रेड में भारी कमी आई।

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इस दस्तावेज में ईरान के भू-राजनीतिक दृष्टिकोण के हिसाब से भारत को एक अहम एशियाई साझेदार बताया गया है। ईरान खुद को और मिडिल ईस्ट को दक्षिण और मध्य एशिया से जोड़ने वाले एक क्षेत्रीय आर्थिक और ट्रांजिट हब के तौर पर फिर से बनाना चाहता है।

ब्लू प्रिंट के हिसाब से ईरान चीन और रूस जैसी बड़ी ग्लोबल ताकतों के साथ संबंधों को फिर से सुधारने पर जोर देने की योजना भी बना रहा है। वहीं, आर्थिक साझेदारी और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा।

डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि ईरान की आने वाली लीडरशिप दोनों देशों के साथ मौजूदा रणनीतिक समझौते की समीक्षा करेगी और साथ ही पारदर्शिता और आपसी हितों के आधार पर सहयोग जारी रखेगी।

ब्लूप्रिंट में पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के साथ जुड़ाव बढ़ाने का भी प्रस्ताव है, खासकर सुरक्षा, काउंटरटेररिज्म सहयोग और क्रॉस-बॉर्डर उग्रवादी गतिविधियों को रोकने जैसे क्षेत्रों में।

क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी लगभग 1978 से देश निकाला में अमेरिका में रहे हैं। क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ईरान के आखिरी राजा के बेटे हैं। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था के समाप्त होने के बाद देश के शासन के लिए एक रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से टेक्नोक्रेट्स, शिक्षाविदों और ईरानी प्रवासी समुदाय के सदस्यों को एक साथ जोड़ा है।

पहलवी और उनके साथी ने इस प्रोजेक्ट को संस्थाओं को फिर से ठीक करने, अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और देश को डेमोक्रेटिक चुनावों और संवैधानिक सुधार के लिए तैयार करने के रोडमैप के तौर पर पेश किया।

ईरान की भौगोलिक स्थिति, फारस की खाड़ी, हिंद महासागर और सेंट्रल एशिया के बीच है। जब ईरान से प्रतिबंध हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय संबंध सामान्य होंगे, तो देश की भौगोलिक स्थिति देश को एक बड़ा कमर्शियल चौराहा बनने दे सकती है।

भारत ने चाबहार पोर्ट पर शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित करने में पहले ही लगभग 12 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। यह भारत को अफगानिस्तान और यूरेशिया से जोड़ने वाले व्यापार रूट को बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही कोशिश का हिस्सा है।

हालांकि, ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फंडिंग की दिक्कतों और इलाके के आसपास बदलते भू-राजनीतिक तनावों की वजह से यह प्रोजेक्ट कभी-कभी धीरे-धीरे आगे बढ़ा है।

यह योजना चाबहार को फिर से शुरू करना और भारत के साथ एनर्जी ट्रेड को फिर से शुरू करना ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर फिर से खोलने और दशकों के अकेलेपन के बाद ग्लोबल कॉमर्स में उसकी वापसी का संकेत होगा।

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