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गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव : हिंद महासागर में सहयोग मजबूत, 14 देशों के नौसेना प्रमुखों ने समुद्री सुरक्षा का संकल्प लिया

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गोवा, 21 फरवरी (khabarwala24)। गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (जीएमसी-26) का पांचवां संस्करण शनिवार को गोवा के नेवल वॉर कॉलेज में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) के 14 देशों के नौसेना प्रमुख और वरिष्ठ मैरीटाइम लीडर शामिल हुए।

कॉन्क्लेव ने क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगी ढांचे को मजबूत करने और सामूहिक प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की। इसकी मुख्य थीम ‘आईओआर में कॉमन मैरीटाइम सिक्योरिटी चुनौतियां, डायनैमिक खतरों को कम करने के लिए प्रोग्रेसिंग लाइन्स ऑफ एफर्ट्स’ थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महासागर’ विजन से प्रेरित है, जो सुरक्षा और विकास के लिए आपसी सहयोग पर जोर देता है। कॉन्क्लेव ने स्ट्रक्चर्ड डायलॉग, रियल-टाइम जानकारी साझा करने और क्षमता विकास पर फोकस किया, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने उद्घाटन करते हुए सभी भागीदार देशों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलते समुद्री खतरों के दौर में टेक्नोलॉजी, आसान जानकारी शेयरिंग और फोकस्ड ऑपरेशन से साझा जागरूकता बढ़ानी होगी। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) ने कीनोट एड्रेस में रियल-टाइम इंटेलिजेंस एक्सचेंज, संस्थागत समन्वय और निरंतर क्षमता विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईयूयू (इललीगल, अनरिपोर्टेड एंड अनरेगुलेटेड) फिशिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग, मानव तस्करी और अन्य ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए साझा जिम्मेदारी की बात कही।

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पहले सेशन में आईयूयू फिशिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग और गैर-कानूनी गतिविधियों पर फोकस था। वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार (रिटायर्ड), पूर्व नेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर, ने मॉडरेट किया। स्पीकरों में रियर एडमिरल टीवीएन प्रसन्ना और मालदीव के कर्नल अमानुल्ला अहमद रशीद शामिल थे। उन्होंने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस नेटवर्क मजबूत करने, इंफॉर्मेशन शेयरिंग सिस्टम की इंटरऑपरेबिलिटी और तेज कोऑर्डिनेटेड रिस्पॉन्स के लिए संस्थागत लिंकेज की जरूरत बताई।

दूसरे सत्र में क्षमता निर्माण और सहयोगी तरीकों पर चर्चा हुई। रियर एडमिरल श्रीनिवास मद्दुला और कैप्टन रणेंद्र एस सावन ने विचार साझा किए। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह (रिटायर्ड) ने मॉडरेट किया। सेशन में रीजनल ट्रेनिंग रिसोर्स पूलिंग, प्रोफेशनल एक्सचेंज और लंबे समय तक मैरीटाइम रेजिलिएंस के लिए फ्रेमवर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया शामिल थे। डेलीगेट्स ने बदलते खतरों जैसे डार्क फ्लीट्स, समुद्री आतंकवाद और स्मगलिंग पर भी चर्चा की।

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समापन में सभी ने क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को संस्थागत बनाने, साझा क्षमता बढ़ाने और सुरक्षित, स्थिर हिंद महासागर के लिए संकल्प लिया। जीएमसी-26 ने भारत की सागरमाला और महासागर पहल के तहत सबको साथ लेकर चलने वाली मैरीटाइम डिप्लोमेसी की मजबूती दिखाई। यह प्लेटफॉर्म आईओआर में सहयोग, संवाद और कार्रवाई का मजबूत माध्यम साबित हुआ।

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