बीजिंग, 3 मार्च (khabarwala24)। चीन के राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक चीन की कुल अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता 2 अरब 34 करोड़ किलोवाट तक पहुंच गई। ’14वीं पंचवर्षीय योजना'(2021-2025) अवधि के दौरान, चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा प्रणाली का निर्माण किया, जिसमें अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत हो गई।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस बात पर जोर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा आर्थिक और सामाजिक विकास से संबंधित है और हमें नई ऊर्जा के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
वर्ष 2025 में देश के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में तीन पहलुओं में अभूतपूर्व विकास देखा गया। पवन और सौर ऊर्जा की संयुक्त स्थापित क्षमता ने ऐतिहासिक रूप से थर्मल पावर को पीछे छोड़ दिया, जो वर्ष 2020 में 53 करोड़ किलोवाट से बढ़कर वर्ष 2025 में 1 अरब 84 करोड़ किलोवाट हो गई। नई ऊर्जा भंडारण क्षमता ने ऐतिहासिक रूप से 10 करोड़ किलोवाट का आंकड़ा पार किया, जो वैश्विक कुल का 40% से अधिक है। अक्षय ऊर्जा ग्रीन सर्टिफिकेट का वार्षिक व्यापार पिछले वर्षों के कुल से अधिक रहा।
’14वीं पंचवर्षीय योजना’ अवधि के दौरान, चीन की नई ऊर्जा में छलांग देखी गई। रेगिस्तानी क्षेत्रों में बड़े पवन और सौर ऊर्जा आधार स्थापित किए गए, जिनकी नई क्षमता 13 करोड़ किलोवाट से अधिक है। वर्तमान में, चीन की कुल बिजली खपत में हरित बिजली की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। साथ ही चीन ने हरित वाहनों और हरित बिजली के उपयोग को प्रोत्साहित किया है, जिससे दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क तैयार हुआ है। ग्रीन सर्टिफिकेट और हरित बिजली व्यापार तंत्र में लगातार सुधार किया जा रहा है, जिससे हरित बिजली की मांग बढ़ रही है।
दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा प्रणाली के निर्माण के साथ, चीन ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ’14वीं पंचवर्षीय योजना’ अवधि के दौरान, चीन द्वारा निर्यात किए गए पवन और सौर उत्पादों ने अन्य देशों में लगभग 4 अरब 10 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद की है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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