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बलूचिस्तान में ‘डेथ स्क्वॉड’ का कहर जारी: मानवाधिकार संगठनों का आरोप- ‘पाक सेना कर रही न्यायेतर हत्याएं’

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क्वेटा, 10 जनवरी (khabarwala24)। बलूचिस्तान में आम लोगों के खिलाफ हिंसा थम नहीं रही है। बड़े मानवाधिकार संगठनों ने एक बार फिर पाकिस्तानी सेना के भयावह चेहरे से नकाब हटाया है। बताया है कि हाल ही में डेथ स्क्वॉड ने दो बलूचों की बिना कानूनी कार्रवाई के हत्या कर दी, इनमें से एक तो नाबालिग था।

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार संगठन, पांक ने बताया कि पंजगुर जिले में तास्प इलाके के रहने वाले बलाच बलूच की 8 जनवरी को हत्या कर दी गई थी। कहा जाता है कि पाकिस्तान के समर्थन वाले डेथ स्क्वॉड ने उसे पकड़ने की कोशिश की और जब वह भागने की कोशिश कर रहा था, तो उसे गोली मार दी गई।

मानवाधिकार समूहों ने कहा, “यह हत्या बलूचिस्तान में एक बड़े पैटर्न को दिखाती है, जहां सुरक्षा बल हथियारबंद गुटों का इस्तेमाल लोगों को जबरन गायब करने और टारगेट किलिंग के लिए कर रहे हैं। वे ऐसा अक्सर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं और कभी-कभी उनके परिवारों के खिलाफ करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।”

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बलूच नागरिकों के खिलाफ अत्याचारों को सामने लाते हुए, एक और ह्यूमन राइट्स बॉडी, बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने शनिवार को बताया कि 5 जनवरी को बलूचिस्तान के केच जिले के होशाब इलाके में एक नाबालिग लड़के, राही बलूच की उसकी दुकान के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

स्थानीय स्रोत का हवाला देते हुए, बीवीजे ने राही की हत्या में पाकिस्तान के समर्थन से चल रहे डेथ स्क्वॉड के शामिल होने का आरोप लगाया। राइट्स बॉडी ने नाबालिग लड़के की बेरहमी से हत्या को बलूच नागरिकों के खिलाफ चल रहे नरसंहार का हिस्सा बताया।

मानवाधिकार संगठन ने कहा, “यह हत्या बलूच बच्चों के जबरन गायब होने और न्यायेतर हत्याओं के बढ़ते पैटर्न के बीच हुई है। कुछ दिन पहले, क्वेटा से 13 साल के एक लड़के, गोहराम बलूच को जबरन गायब कर दिया गया था। बलूचिस्तान में भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें सरकारी सुरक्षा बलों और उनसे जुड़े हथियारबंद ग्रुप्स के शामिल होने के आरोप हैं।”

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इस बीच, अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ बलूचिस्तान (HRCB) ने 2025 में जबरन गायब होने के कम से कम 1,455 मामलों को डॉक्यूमेंट किया है।

एचआरसीबी ने आंकड़ों की जुबानी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अपराध की कहानी साझा की है। अपहरण के अधिकतर मामलों में पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स की संलिप्तता पाई गई। 889 मामलों में इस बल का हाथ रहा। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ​​288 तो काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (आतंक विरोधी विभाग) 233 और डेथ स्क्वॉड 41 मामलों में शामिल थे।

अधिकार संगठन ने मोडस ऑपरेंडी यानी इन बदनाम सैन्य बलों के काम करने के तरीके का भी उल्लेख किया है। इसके अनुसार किसी को जबरदस्ती अगवा करने के लिए ये लोग घरों पर छापे मारते हैं। ऐसे करीब 985 मामले सामने आए। इन बलों ने अपनी ताकत के जोर पर 372 लोगों को हिरासत में लिया, 66 लोगों को चेकपॉइंट पर भेजा गया और 32 लोगों को सैन्य छावनियों में जबरन बुलाया गया।

बलूचिस्तान के लोग अभी भी पाकिस्तान से अपनी आजादी के लिए लड़ रहे हैं।

बलूचिस्तान के विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने प्रांत में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे दमन पर बार-बार प्रकाश डाला है। इन कार्रवाइयों में बलूच नेताओं और आम लोगों के घरों पर हिंसक छापे, गैर-कानूनी गिरफ्तारियां, जबरन गायब करना, कथित “किल एंड डंप” पॉलिसी, मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस के तहत हिरासत में लेना और मनगढ़ंत पुलिस केस दर्ज करना शामिल है।

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