लंदन, 3 दिसंबर (khabarwala24)। बलूच महिलाओं के अपहरण और अंदरूनी सुरक्षा अभियान में ड्रोन के इस्तेमाल का मुद्दा यूके की संसद में भी गूंजा। हाउस ऑफ कॉमन्स में, सांसद जॉन मैकडॉनेल ने मानवाधिकार हनन को लेकर चिंता जताई।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मैकडॉनेल ने वहां की संसदीय प्रणाली के तहत कुछ सवाल पेश किए और यूके सरकार से जवाब देने के लिए ‘अर्ली डे मोशन’ पेश किया। मैकडॉनेल ने बलूचिस्तान में हाल के घटनाक्रम पर चिंता जताई।
5 अक्टूबर को खुजदार के जेहरी में हुए ड्रोन हमले में छह लोगों की मौत (जिनमें चार बच्चे भी शामिल थे) समेत 29 मई से लापता दिव्यांग महजबीन बलूच और 22 नवंबर को किशोरवय नसरीना बलूच के अपहरण की ओर ध्यान दिलाया गया।
इसके अलावा, सजा देने के तरीकों, खासकर 17 नवंबर को पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स द्वारा पांच बलूच महिलाओं की गिरफ्तारी पर भी चिंता जताई गई।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार से प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई। साथ ही मंत्रियों को उस आश्वासन की भी याद दिलाई जो उन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से मिली थी।
प्रस्ताव के अलावा, मैकडॉनेल ने तीन सवाल भी पूछे। पहला, क्या विदेश सचिव ने पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने बलूचिस्तान में ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है; दूसरा, क्या डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस एंड ट्रेड ने इस जोखिम का आकलन किया कि यूके से सप्लाई किए गए उपकरण कहीं इस इलाके में गलत तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किए जा रहे?; और तीसरा, क्या सैन्य या दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के लिए कोई निर्यात लाइसेंस जारी किए गए हैं जिनका इस्तेमाल बलूचिस्तान में ड्रोन ऑपरेशन या आतंरिक सुरक्षा अभियान में किया जा सकता है?
नवंबर की शुरुआत में, एक बड़े मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान के गंभीर मानवीय संकट की ओर ध्यान दिलाया था और पाकिस्तानी अधिकारियों की ज्यादतियों का खुलासा किया था।
‘बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने सितंबर और अक्टूबर के दौरान जबरदस्ती गायब किए गए 168 पीड़ितों का दस्तावेज तैयार कर पेश किया था। बताया कि इनमें से 12 पीड़ितों को छोड़ दिया गया, 17 को हिरासत में ही मार दिया गया, और 140 को गायब कर दिया गया। बलूचिस्तान के केच में सबसे ज्यादा 54 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद पंजगुर में 26, डेरा बुगती में 21 और क्वेटा में 20 मामले दर्ज किए गए थे।
नतीजों के मुताबिक, जबरदस्ती गायब किए जाने के ज्यादातर शिकार 19 से 25 साल के बीच के हैं, और वे अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े हैं। गायब हुए लोगों में 53 विद्यार्थी, 21 नाबालिग और एक महिला शामिल है। पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) सबसे बड़ी अपराधी के तौर पर पहचानी गई है, जो 45 फीसदी मामलों में शामिल रही, इसके बाद काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) का नंबर आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान न्यायेतर हत्या के 25 मामले दर्ज किए गए, जिसमें एक नाबालिग और एक महिला की मौत हुई।
रिपोर्ट में बताया गया है, “ज्यादातर पीड़ित पहले गायब हुए लोग थे जिन्हें या तो कस्टडी में मार दिया गया या इतनी यातना दी गई कि उनकी मौत हो गई।”
Source : IANS
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