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Bangladesh: शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा, बांग्लादेश ICT ने करार दिया मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी

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नई दिल्ली, 17 नवंबर (khabarwala24)। बांग्लादेश (Bangladesh) की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बड़ा झटका लगा है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुना दी है। यह फैसला 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और हत्याओं से जुड़ा है। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री और पूर्व पुलिस महानिदेशक को भी फांसी की सजा सुनाई गई है।

ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?

जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने 400 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया। बेंच में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी शामिल थे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाने, हेलीकॉप्टर से हमला करने और हिरासत में यातना देने के सीधे आदेश दिए थे।

कितने लोग मारे गए?

ट्रिब्यूनल के अनुसार इस हिंसा में करीब 1400 लोग मारे गए और 11 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। ज्यादातर मौतें सेना-पुलिस की गोलियों से हुईं। कई मामलों में 5 मीटर की दूरी से सिर और सीने पर गोली मारी गई।

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हेलीकॉप्टर से बमबारी और गोलीबारी के सबूत

ट्रिब्यूनल ने कई वीडियो सबूतों का हवाला दिया जिसमें हेलीकॉप्टर से लोगों पर गोलीबारी दिखाई दे रही है। शेख हसीना पर आरोप है कि उन्होंने छात्र आंदोलन को आतंकी गतिविधि बताकर दमन करने का आदेश दिया था।

घायलों का इलाज तक नहीं होने दिया गया

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में भर्ती करने से रोका गया। डॉक्टरों को धमकी दी गई कि किसी को एडमिट न करें। कई डॉक्टरों ने गवाही दी कि उन्हें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलने के लिए मजबूर किया गया। एक घायल का वीडियो दिखाया गया जिसमें उसकी दोनों आंखों से खून बह रहा था और वह मदद मांग रहा था, लेकिन कोई मदद नहीं की गई।

शेख हसीना और मंत्रियों की फोन बातचीत हुई पेश

ट्रिब्यूनल में शेख हसीना और उनके पूर्व मंत्री हसनुल हक इनु के बीच फोन पर हुई बातचीत के ऑडियो भी चलाए गए। इनमें साफ सुनाई दे रहा था कि कैसे छात्रों को कुचलने की योजना बनाई गई थी।

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तीन बड़े नेता दोषी ठहराए गए

  • शेख हसीना (पूर्व प्रधानमंत्री)
  • असदुज्जामान खान कमाल (पूर्व गृह मंत्री)
  • चौधरी अब्दुल्ला अल मामून (पूर्व आईजीपी)

तीनों को आपराधिक साजिश रचने और मानवता के खिलाफ अपराध करने का दोषी ठहराया गया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के सीधे आदेश पर इतनी बड़ी संख्या में हत्याएं हुईं।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट भी आधार बनीं

ट्रिब्यूनल ने यूएन की रिपोर्ट, ओम्नेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं के दस्तावेजों का हवाला दिया। हजारों वीडियो, फोटो और गवाहों के बयान को सबूत के तौर पर पेश किया गया।

ढाका में बवाल, हसीना समर्थक सड़कों पर

फैसले के बाद ढाका में शेख हसीना के समर्थक सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया। अवामी लीग कार्यकर्ता भारी संख्या में जमा हो रहे हैं।

शेख हसीना का वीडियो मैसेज

भारत में शरण लिए हुए शेख हसीना ने अपने समर्थकों को वीडियो संदेश भेजा है। उन्होंने कहा, “मुझे कोई परवाह नहीं, जो फैसला देना है दे दो। ये सब राजनीतिक बदला है।” उन्होंने आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया।

क्या यह फैसला अंतिम है?

अभी अपील का रास्ता बाकी है, लेकिन बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार ने साफ कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर सजा दिलाई जाएगी। शेख हसीना अभी भारत में हैं, ऐसे में प्रत्यर्पण का मामला भी गरमा सकता है।
यह फैसला बांग्लादेश के इतिहास में सबसे बड़ा और विवादास्पद फैसला माना जा रहा है। एक तरफ छात्र और पीड़ित परिवार इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ अवामी लीग समर्थक इसे साजिश करार दे रहे हैं।

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